कवि नहीं मैं काव्य मरघट का पुराना भूत हूं,
खेत, पेड़, जंगल, वन, पहाड़ से अभिभूत हूं,
पर्यावरण संरक्षण का रक्षक एवं एक दूत हूं,
पेड़ों की कटाई से बेहद क्षुब्ध और क्रोधित हूं,
पृथ्वी श्रृंगार व प्रकृति हरियाली से मोहित हूं,
पर्यावरण से छेड़छाड़ करने वालों का यमदूत हूं,
पर्यावरण जीवित रहे, इसी चिंतन का मेघदूत हूं,
जीव-जंतुओं का प्राण, पर्यावरण का वायुदूत हूं,
भावी पीढ़ियों को ऑक्सीजन मिले, मैं भयभीत हूं,
पीपल की छांव, अपने प्यारे गांव से वशीभूत हूं,
उत्पादन की ऊंचाइयों के लिए प्रदूषण-मुक्त हूं,
वैश्विक युद्ध में पर्यावरण के दुश्मनों से कंपित हूं,
बम-बारूद, ड्रोन, मिसाइल प्रयोग से कुपित हूं,
विश्व के पर्यावरण-विनाशी, आतंकी प्रवृत्ति से व्यथित हूं,
पर्यावरण संरक्षण मानक अपनाने वालों का मीत हूं,
भारत मां का पूत, पर्यावरण संरक्षण का सपूत हूं !!
“आओ पेड़ लगाएं, कार्य ये नेक महान,
भावी पीढ़ी याद करेगी, पुनर्जन्म समान।”
आचार्य संजय सिंह ’चंदन’
