संजय राऊत
‘वेदांता’ समूह के अनिल अग्रवाल पर ‘ईडी’ की छापेमारी चौंकाने वाली है। अग्रवाल नरेंद्र मोदी को देवतुल्य मानते थे। कॉर्पोरेट जगत के मशहूर अंधभक्त, मोदी-शाह से भी ज्यादा प्रखर हिंदुत्ववादी, ऐसे हैं ये अग्रवाल। उन्होंने ऐसा क्या गुनाह कर दिया? अग्रवाल ने बेईमानी से टक्कर लेने की कोशिश की। उसमें हिंदुत्व पराजित हो गया।’
भारत में उद्योग-धंधा करने लायक अच्छा माहौल नहीं बचा है। प्रधानमंत्री मोदी का कालखंड ‘अमृतकाल’ है, ऐसा बताया जाता है। लेकिन आर्थिक और औद्योगिक मोर्चे पर देश पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। मोदी के अमृतकाल में कम से कम दस हजार मध्यम और बड़े उद्योगपति देश छोड़कर चले गए। यह लक्षण अच्छा नहीं है। ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ भारत में व्यापार करने आई। व्यापार करते-करते उन्होंने देश पर भी कब्जा कर लिया। ‘स्टेट कैप्चर’ की जो घटना तब घटी थी, वह आज भी घटती दिख रही है। ईस्ट इंडिया कंपनी के समय उद्योग का जो माहौल भारत में था, उतना भी आज नहीं दिखता। उसी दौर में टाटा, फिर बिड़ला, बजाज, किर्लोस्कर वगैरह उद्योग अच्छा मुनाफा कमा रहे थे। महात्मा फुले अंग्रेजों के दौर में ‘इन्फ्रॉस्ट्रक्चर’ का काम करने वाली कंपनी चलाते थे और उनका टर्नओवर ‘टाटा’ से भी ज्यादा था। आज के अमृतकाल में प्रधानमंत्री मोदी जिसे कहेंगे वही उद्योग करेगा और वही मुनाफा कमाएगा, अगर यही नीति तय हो गई है तो उद्यमी सीधे देश से बाहर बोरिया-बिस्तर बांधकर चले जाएंगे और इसी तरह से लोग अब बाहर भी निकल रहे हैं। यह सब मैं क्यों लिख रहा हूं, तो वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के उद्योगों पर पड़ रही ‘ईडी’ की छापेमारी से देशभर में हड़कंप मचा हुआ है। अनिल अग्रवाल कोई छोटे-मोटे उद्योगपति नहीं हैं। दुनियाभर में सम्मान पाने वाले भारतीय उद्योगपति हैं। उन्होंने बड़ी मेहनत से करीब डेढ़ लाख करोड़ का अपना औद्योगिक साम्राज्य खड़ा किया है। वे काफी हद तक ईमानदार हैं। फिर अचानक उन पर छापे क्यों पड़ने लगे? उनके खिलाफ एक के बाद एक मामले दर्ज क्यों हो रहे हैं? मोदी के ही अंधभक्त अनिल अग्रवाल से क्या गलती हो गई? इसका जवाब एक ही वाक्य में देना हो तो अनिल अग्रवाल ने गौतम अडानी की बेईमानी को चुनौती दी। अग्रवाल ने भारतीय अर्थव्यवस्था में चल रही ‘सब कुछ अडानी’ की भूमिका से टक्कर लेने की कोशिश की। नतीजा? ‘ईडी’ और अन्य जांच एजेंसियों ने उनके उद्योगों में घुसकर दहशत पैदा कर दी। उत्तर प्रदेश का मशहूर ‘जेपी’ उद्योग समूह डूब गया और सरकारी बैंकों की बकाया रकम बढ़ गई, तब बैंकों ने उसकी संपत्ति की नीलामी शुरू की। अनिल अग्रवाल कानूनी तरीके से इस प्रक्रिया में उतरे। अग्रवाल की तरफ से १७ हजार करोड़ रुपए की सबसे ऊंची बोली लगाई गई। इस होड़ में ‘अडानी’ थे। उनकी तरफ से १४ हजार करोड़ की बोली लगाई गई। कानूनन अग्रवाल की बोली तीन हजार करोड़ ज्यादा होने के कारण अग्रवाल को बताया गया कि वे नीलामी जीत गए हैं, लेकिन पंद्रह दिन बाद अनिल अग्रवाल को ‘‘माफ कीजिए, आपको ‘जेपी’ की कंपनियों का कब्जा नहीं दिया जा सकता। ये कंपनियां गौतम अडानी को चाहिए,’’ ऐसा जवाब देकर उनका हक मार दिया गया।
अनिल अग्रवाल की प्रतिष्ठा का यह सवाल था। अग्रवाल सीधे सुप्रीम कोर्ट गए। सुप्रीम कोर्ट में उन्हें न्याय नहीं मिला। जब वे पीछे नहीं हटे तो उन पर ‘पेड़ काटने’ जैसे कारणों के मामले दर्ज किए गए और अब उनकी कंपनियों पर ‘ईडी’ ने छापेमारी शुरू कर दी।
इन छापों का मतलब क्या है? अडानी और मोदी एक ही हैं। (जैसा राहुल गांधी हमेशा कहते हैं, राज्य और संपत्ति अडानी की है। मोदी उनके रखवाले हैं।)
पटना, मुंबई, इंग्लैंड
अब ‘वेदांता’ के अनिल अग्रवाल के बारे में समझते हैं।
– उन्होंने शून्य से अपना औद्योगिक साम्राज्य खड़ा किया।
– पटना, मुंबई और इंग्लैंड का उनका सफर प्रेरणादायी है।
– अग्रवाल मोदी और संघ से भी ज्यादा कट्टर हिंदुत्ववादी हैं। श्रीराम जन्म मंदिर प्रतिष्ठापना के समय वे माथे पर चंदन वगैरह लगाकर मौजूद थे।
– मैंने उनका एक इंटरव्यू देखा। लंदन में अपने आलीशान घर में बैठकर वे बेहद विनम्रता से वैदिक धर्म, सनातन हिंदुत्व, श्रीकृष्ण, श्रीराम, गीता पर बात कर रहे थे। उन्होंने इंग्लैंड में हिंदू-वैदिक विचारों को प्राथमिकता देने वाले स्कूल बनाए। हिंदुत्व का प्रचार हो, इसके लिए उन्होंने बड़ा दान दिया। लंदन में भी वे रोज सुबह नियम से मंदिर जाते हैं। अग्रवाल ने कहा, ‘‘मोदी की वजह से भारतीयों को दुनिया में सम्मान और प्रतिष्ठा मिलने लगी है। मोदी महान हैं। मोदी की वजह से हमारा सीना गर्व से फूल जाता है।”
– ‘मोदी के पक्के अंधभक्त’ के रूप में अग्रवाल की कॉर्पोरेट जगत में ख्याति थी। मोदी भगवान का रूप हैं, ऐसी आरती भी अनिल अग्रवाल ने गाई। भारतीय जनता पार्टी को चुनावी बॉन्ड के जरिए २२६ करोड़ रुपए का दान उन्होंने दिया। उसके बदले में भगवान मोदी ने अब अग्रवाल को जहर का प्याला दिया है। ‘जेपी’ (Jay Pee) मामले में अडानी के खिलाफ कोर्ट जाने के कारण अग्रवाल को उनके देवता ने सूली पर चढ़ाने का फैसला किया है। अब अंधभक्त अग्रवाल क्या करेंगे? अडानी के खिलाफ केस वापस लेकर बेईमानी का समर्थन वे करेंगे, यह तय है। इसके अलावा उनके पास कोई विकल्प नजर नहीं आता। अडानी की बेईमानी के खिलाफ पंगा लेकर अग्रवाल ने प्रधानमंत्री मोदी को ही चुनौती दे दी। इसलिए ‘देवता’ नाराज हो गए। इस वजह से अग्रवाल का हिंदुत्व, भाजपा को दी गई मदद, मोदी की भक्ति सब चूल्हे में गई।
घृणास्पद स्पर्धा
भारतीय उद्योग जगत में ऐसी ‘अडानी ब्रैंड’ की घृणास्पद स्पर्धा इससे पहले कभी नहीं हुई थी। मनमोहन सिंह और नरसिम्हा राव ने भारतीय अर्थव्यवस्था और भारतीय बाजार को ‘मुक्त’ किया, तब हमारी अर्थव्यवस्था में बहार आ गई, लेकिन मोदी काल में कुछ अलग ही हो रहा है। मोदी सत्ता में आएं, इसके लिए शुरुआती दौर में साथ देने वाले लगभग सभी को मोदी ने किनारे कर दिया है, लेकिन उद्योगपतियों को निपटाने के लिए ‘ईडी’ जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल होना दुर्भाग्यपूर्ण है! ईडी सिर्फ अडानी को मनचाही संपत्ति दिलाने का जरिया नहीं है, बल्कि कोर्ट के बाहर समझौता करवाने का हथियार भी बन गई है। मुंबई एयरपोर्ट का कब्जा रेड्डी (जीवीके) से लेते वक्त ‘ईडी’ ने यही तरीका अपनाया था। लोग अब पूछ रहे हैं, वेदांता ग्रुप पर भी इसी तरह अडानी कब कब्जा करेंगे? चेन्नई की Coastal Energen, जो १२०० MW की कोल बेस्ड थर्मल पावर कंपनी है, उसे ‘ईडी’ की मदद से हथियाने का काम अडानी ने किया। कंपनी को आर्थिक मुश्किल में लाया गया। SBI ने Insolvency प्रोसेस शुरू की। कंपनी के मालिक अहमद बुहारी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया गया। बुहारी को गिरफ्तार किया गया। वे ३१ महीने जेल में रहे। इसी दौरान अडानी ने बुहारी की कंपनी पर कब्जा कर लिया। कंपनी पूरी तरह अडानी के कब्जे में आने के बाद ही अहमद बुहारी को जमानत मिली। अब चेन्नई (PMLA) कोर्ट ने बुहारी को लगभग निर्दोष मुक्त कर दिया है। मनी लॉन्ड्रिंग के कोई सबूत नहीं मिले, लेकिन उनकी कंपनी पहले ही अडानी के पास चली गई। भारतीय जमीन पर इस तरह उद्योग किसी ने नहीं किया। इसलिए अडानी भले ही दुनिया के अमीर उद्योगपति बन गए हों, लेकिन उन्हें वह सम्मान और प्रतिष्ठा कभी नहीं मिली। लोग तंज में कहते हैं कि पैसा तो दाऊद इब्राहिम के पास भी है। गौतम अडानी को धारावी समेत पूरी मुंबई अपने कब्जे में लेकर बेचनी है। इसलिए जो भी विरोध करेगा उस पर ‘ईडी’ का हमला किया जाएगा। देश एक भयानक मोड़ पर खड़ा है। यह मोड़ गिरावट का है। विजय माल्या, ललित मोदी, नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, नितिन संदेसरा इन सब पर ‘ईडी’ ने शिकंजा कसा क्योंकि उन्होंने बैंकों का कर्ज डुबाया था। बैंकों का नुकसान यानी राष्ट्रीय खजाने का नुकसान, लेकिन ‘वेदांता’ के अनिल अग्रवाल के मामले में बैंकों को तीन हजार करोड़ का फायदा हो रहा था, फिर भी ‘ईडी’ ने अनिल अग्रवाल पर छापे मारे।
बैंकों को नुकसान पहुंचाने वाले ‘अडानी’ के लिए मोदी की नियंत्रण वाली जांच एजेंसियां काम कर रही हैं।
‘वेदांता’ का हिंदुत्व यहां पराजित हो गया!
