सामना संवाददाता / नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए गठित ट्रिब्यूनलों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिस गति से मामलों का निपटारा हो रहा है, ‘इस रफ्तार से तो अगला चुनाव आ जाएगा।’
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से इन ट्रिब्यूनलों में अब तक आए मामलों और उनके निपटारे का पूरा ब्यौरा मांगा है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि ट्रिब्यूनलों का कामकाज अपेक्षा के अनुरूप नहीं पाया गया तो उनकी कार्यप्रणाली में बदलाव पर भी विचार किया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई २५ अगस्त को होगी।
लंबित मामलों पर अदालत की नजर
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि काफी समय बीत चुका है। ऐसे में अब यह जानना जरूरी है कि ट्रिब्यूनलों के सामने कितने मामले पहुंचे और उनमें से कितनों का निपटारा हुआ। मुख्य न्यायाधीश ने मामलों के निपटारे की धीमी गति पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि इसी गति से काम चलता रहा तो सभी अपीलों की सुनवाई पूरी होने तक अगला चुनाव आ जाएगा। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने भी ट्रिब्यूनलों में मामलों के निपटारे की गति पर सवाल उठाया। उन्होंने अदालत को बताया कि उनकी अपील अब भी लंबित है। इसका असर यह हुआ कि उन्हें राशन व्यवस्था के तहत मिलने वाला राशन भी नहीं मिल पा रहा है।
वोटर लिस्ट से नाम हटने पर राशन रोकना अलग मुद्दा
इस पर न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटने के आधार पर किसी व्यक्ति को राशन देने से राज्य सरकार इनकार कर सकती है या नहीं, यह अलग मुद्दा है। इस सवाल को हाई कोर्ट के समक्ष भेजे जाने की बात कही गई। सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही स्पष्ट किया कि वह ट्रिब्यूनलों के पैâसलों और उनके परिणामों पर भी नजर रखेगा।
दूरदराज के लोगों के सामने बड़ी मुश्किल
सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि पश्चिम बंगाल के दूरदराज के इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति कमजोर है। ऐसे में वहां रहने वाले लोगों के लिए अपनी अपील की सुनवाई में शामिल होने के लिए कोलकाता तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो रहा है। इन तमाम दलीलों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह अब तक ट्रिब्यूनलों के समक्ष दाखिल मामलों, निपटाए गए मामलों और लंबित मामलों का विस्तृत आंकड़ा अदालत के सामने पेश करे। अब २५ अगस्त को होने वाली सुनवाई में ट्रिब्यूनलों की कार्यप्रणाली और एसआईआर से जुड़े मामलों की प्रगति पर अदालत की नजर रहेगी।
