मुख्यपृष्ठनए समाचारमाथाडी कामगारों के रोजगार पर असामाजिक तत्वों का कब्जा!

माथाडी कामगारों के रोजगार पर असामाजिक तत्वों का कब्जा!

-पंतनगर पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

सामना संवाददाता / मुंबई
घाटकोपर-पूर्व स्थित पंतनगर पुलिस की हद में अधिकृत माथाडी कामगारों के रोजगार पर कथित तौर पर स्थानीय आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के हस्तक्षेप का मामला सामने आया है। आरोप है कि विकास कार्यों में वर्षों से काम कर रहे महाराष्ट्र राज्य माथाडी, हमाल एवं अन्य हाथ मजदूर (रोजगार एवं कल्याण) अधिनियम, १९६९ के तहत पंजीकृत कामगारों को कथित तौर पर डराया-धमकाया जा रहा है। इस मामले में पंतनगर पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, घाटकोपर-पूर्व के विभिन्न इलाकों में कई विकासकों द्वारा बड़े पैमाने पर निर्माण एवं विकास कार्य शुरू हैं। इन विकासकों के यहां पहले अधिकृत एवं पंजीकृत माथाडी कामगारों की टोलियां काम करती थीं। इसी रोजगार से वे अपने और अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। हालांकि, अब आरोप है कि कुछ स्थानीय लोगों द्वारा कथित तौर पर दबाव और धमकी के जरिए इन कामों पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है।
कामगारों का आरोप है कि कुछ तथाकथित अनधिकृत टोलियां विकासकों और अधिकृत माथाडी कामगारों पर दबाव बनाकर काम अपने हाथ में ले रही हैं। इतना ही नहीं, विकासकों पर कथित तौर पर दबाव डालकर काम से संबंधित लेटर भी हासिल किए जा रहे हैं। इससे पंजीकृत माथाडी कामगारों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है और उनके परिवारों पर आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि पंतनगर पुलिस क्षेत्र में ऐसी कथित अनधिकृत टोलियों का प्रभाव बढ़ रहा है। आरोप यह भी है कि इनके कारण अधिकृत माथाडी कामगारों को अपने जान-माल की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। कुछ कामगारों का कहना है कि जब वे कथित तौर पर काम में हस्तक्षेप करने वाले लोगों के खिलाफ शिकायत करने का प्रयास करते हैं, तो उन्हें दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ता है। कुछ माथाडी कामगारों ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें पुलिस से अपेक्षित सुरक्षा मिलने के बजाय कथित तौर पर दबाव का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते कामगारों में भय का माहौल बना हुआ है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग
कामगारों की मांग है कि पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और गंभीरता से जांच की जाए। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और अधिकृत माथाडी कामगारों को उनका वैधानिक रोजगार एवं सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। कामगारों का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले में हस्तक्षेप नहीं किया गया तो क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। इसलिए पुलिस प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच और कामगारों को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की गई है।

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