-वरिष्ठ अभिनेत्री उषा चव्हाण के बयान से कटघरे में महायुति सरकार
-जमीन और टीडीआर विवाद को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप
-उन्होंने यह भी पूछा कि जब उनके बेटे का उस संपत्ति पर अधिकार है तो उसके अधिकार को नजरअंदाज करने का प्रयास क्यों किया जा रहा है। आखिर ऐसा करके संबंधित लोगों को क्या हासिल होगा?
सामना संवाददाता / मुंबई
अपने अभिनय और नृत्य से दशकों तक मराठी दर्शकों के दिलों पर राज करनेवाली वरिष्ठ अभिनेत्री उषा चव्हाण इन दिनों अपनी फिल्मों को लेकर नहीं, बल्कि पुणे स्थित अपनी पारिवारिक जमीन और टीडीआर हस्तांतरण विवाद को लेकर चर्चा में हैं। इस मामले को लेकर परेशान उषा चव्हाण ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाते हुए कहा है कि ‘ऐसा लगता है कि राज्य में राक्षसों का राज है।’ उनके इस बयान से महायुति सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
उषा चव्हाण का आरोप है कि उनकी पारिवारिक संपत्ति और टीडीआर से जुड़े मामले में उन्हें और उनके बेटे को लगातार परेशान किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में उन्हें उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ओर से आश्वासन भी मिला था, लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।
उषा चव्हाण ने कहा कि उन्होंने अपना जीवन गौरव पुरस्कार आनंद दिघे के आश्रम में रखकर इस मामले में न्याय की उम्मीद जताई थी। उस समय तत्कालीन उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उनकी पूरी बात सुनकर कानूनी पहलुओं को समझा और काम कराने का आश्वासन दिया था। लेकिन अभिनेत्री का कहना है कि अब उनके और उनके बेटे के सामने नई परेशानियां खड़ी की जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कार्यालय से भेजे गए एक पत्र में ऐसी बातें लिखी गई हैं, जिन्हें लेकर वह बेहद आहत हैं, जिसके लिए मैंने संघर्ष किया, वह दूसरों को कैसे दे सकते हैं? टीडीआर के मुद्दे पर उषा चव्हाण ने सवाल उठाते हुए कहा कि जिस अधिकार के लिए उन्हें उपवास तक करना पड़ा। जिस जमीन और अधिकार के लिए उन्होंने जीवनभर संघर्ष किया, उसे दूसरे राज्य से आए लोगों को वैâसे सौंपा जा सकता है?
