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१५ लाख करोड़ रुपए का घोटाला… मोदी सरकार ने निकाला कॉर्पोरेट का दिवाला!.. रोहित पवार का केंद्र पर हमला

सामना संवाददाता / मुंबई

देश के कॉर्पोरेट जगत में सामने आए १५ लाख करोड़ रुपए के कथित राजस्व घोटाले को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। बंगलुरु स्थित राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के मालिक राजेश मेहता पर लगे गंभीर आरोपों के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक रोहित पवार ने भाजपा सरकार और नियामक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर तीखा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने कॉर्पोरेट का दिवाला निकाल दिया है। इस घटना के बाद कॉर्पोरेट कंपनियों पर जनता को विश्वास करना मुश्किल हो रहा है।
रोहित पवार ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह दुनिया के सबसे बड़े अकाउंटिंग घोटालों में से एक होगा। उन्होंने विशेष रूप से एलआईसी की निवेश नीति पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब कई निजी म्यूचुअल फंड कंपनियां कथित तौर पर इस कंपनी में निवेश करने से बच रही थीं, तब एलआईसी ने उसमें निवेश वैâसे किया? इसके लिए किसने दबाव बनाया इसकी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले ने बाजार नियामक संस्था सेबी और अन्य निगरानी तंत्र की कार्यक्षमता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। पवार ने कहा कि सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि एलआईसी का निवेश आम नागरिकों की मेहनत की कमाई से जुड़ा होता है। ऐसे में यदि सार्वजनिक धन जोखिम में पड़ा है तो इसकी जवाबदेही कौन लेगा।
जनता का पैसा खतरे में
सरकारी संस्थाओं की निष्क्रियता और नियामक एजेंसियों की कथित विफलता के कारण जनता का पैसा खतरे में पड़ सकता है। रोहित पवार ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच कराई जाए तथा यह स्पष्ट किया जाए कि निवेश से जुड़े निर्णय किन आधारों पर लिए गए। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

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