-‘दिल्ली दूर नहीं’, सियासी हलकों में चर्चा
-पुलिस ने अभिजीत दीपके के घर को घेरा
सामना संवाददाता / मुंबई
कुछ ही दिनों में चर्चा के केंद्र में आई कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए इस प्रदर्शन को लेकर जहां दिल्ली में राजनीतिक माहौल गरमाया रहा, वहीं छत्रपति संभाजीनगर में दीपके के घर को पुलिस ने घेर लिया है। भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच अब संभाजीनगर छावनी में तब्दील हो गया है।
दिल्ली में दीपके के आंदोलन के समानांतर संभाजीनगर में भी पुलिस का तगड़ा बंदोबस्त देखने को मिला। इस जिले में लोगों के मूवमेंट पर पुलिस की पैनी नजर थी। हर तरफ जांच और वाहनों की आवाजाही पर नजर रखी गई। दीपके के गांव वालूज स्थित उनके निवास के दो किमी दूर तक पुलिस की व्यापक तैनाती की गई। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्वयं मौके का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। अपराध शाखा, विशेष शाखा और स्थानीय पुलिस थाने के अधिकारियों की मौजूदगी ने पूरे इलाके को छावनी जैसा माहौल दे दिया।
बता दें अमेरिका से लौटने के बाद अभिजीत दीपके सीधे दिल्ली पहुंचे और जंतर-मंतर पर आंदोलन का नेतृत्व किया। इस दौरान बड़ी संख्या में समर्थक उनके साथ मौजूद रहे।
विपक्ष ने साधा निशाना
दीपके के घर के बाहर तैनात पुलिस बल और प्रशासन की सक्रियता ने विपक्ष को सरकार पर निशाना साधने का मौका दे दिया है। विपक्षी हलकों में इसे सरकार की घबराहट से जोड़कर देखा जा रहा है, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया एहतियाती कदम था।
जनआंदोलन को लेकर चिंतित
राजनीतिक गलियारों में अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर एक नए राजनीतिक संगठन के आंदोलन को लेकर इतनी सतर्कता क्यों दिखाई गई? क्या सरकार किसी संभावित जनआंदोलन के विस्तार को लेकर चिंतित है, या फिर यह केवल एहतियाती सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा था?
