सूफी खान
अमेरिका माने या न माने लेकिन कड़वी सच्चाई तो ये है कि ईरान ने ४० दिनों की जंग में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जीता है। जंग अमेरिका और इजरायल ने उस पर थोपी थी। जंग के पहले होर्मुज सबके लिए बहाल था। ईरान वहां कोई सीधा दखल नहीं रखता था। लेकिन युद्ध के बाद हालात कुछ और हैं। ईरान हारा नहीं है। वहां आज में इस्लामिक रेवॉल्यूशन की सरकार है। ऐसे में जंग में जीती हुई चीजें वो भला क्यों वापस करे, जिन्होंने लड़ाई शुरु की वो बताएं कि आबनाए होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से ईरान पैसा क्यों ना वसूले। लेकिन ईरान का ये प्लान कई देशों को पसंद नहीं आ रहा था कि होर्मुज से प्रतिदिन गुजरने वाले जहाजों से ईरान टोल चार्ज ले। अब ईरान ने इसका भी हल निकाला है। ईरान ने दुनिया के इस अहमतरीन समुद्री रास्ते पर नया फलसफा दिया है। वो है टैक्स नहीं फीस वो भी सर्विस के बदले।
ईरान ये इशारे दे रहा है कि वो अब जहाजों से सीधे टोल टैक्स नहीं वसूलेगा बल्कि ओमान के साथ मिलकर एक नया सिस्टम बनाना चाहता है। इस व्यवस्था के तहत जहाजों से नेविगेशन, सुरक्षा और अन्य सर्विस के बदले फीस ली जाएगी। ईरान के डिफ्टी फॉरेन मिनिस्टर काजेम गरीबाबादी ने कुछ इस तरह के इशारे दिए हैं। उनका कहना है कि ईरान किसी जहाज से गुजरने के अधिकार के बदले फीस नहीं लेना चाहता। उन्होंने साफ किया कि प्रस्तावित फीस उन सेवाओं के लिए होगी जो ईरान और ओमान मिलकर मुहैया कराएंगे।
इनमें नेविगेशन सपोर्ट, सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन, समुद्री सुरक्षा और पॉल्यूशन के हालात को सुधारना जैसी सर्विस शामिल हैं। जंग से अलग नार्मल दिनों स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से १२० से १४० जहाज गुजरते हैं। इनसे अगर फीस वसूली जाए तो अच्छा खासी इनकम हो सकती है। ईरान ने इसके लिए पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ( पीजीएसए) बनाई है। ये अथॉरिटी होर्मुज स्ट्रेट में होने वाली गतिविधियों की निगरानी करेगी और रियल टाइम अपडेट जारी करेगी। वहीं इसे अमेरिका ने तुरंत इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के जुड़ा संगठन बताते हुए प्रतिबंधों की लिस्ट में डाल दिया। अमेरिका की नजर में आईआरजीसी आतंकी संगठन है।
अब देखना होगा कि टोल टैक्स के बदले सर्विस फीस लेने के ईरानी फलसफे पर अमेरिका का रिएक्शन क्या होता है। वैसे भी होर्मुज पर अमेरिका फंस चुका है और ईरान अमेरिका किसी भी डील में ईरान टस से मस होने से रहा, ये अमेरिका भी जान रहा है।
