मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे दान की चोरी का सनसनीखेज मामला उभर कर सामने आया है भक्त श्रद्धालु हतप्रभ स्थिति में हैं। समाजवादी पार्टी के प्रमुख पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और दान संग्रह पर अनेक सवाल किए हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने कथन में दावा किया है कि राम मंदिर से श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपये का चढ़ावा गायब हुआ है। विपक्ष के अनुसार, यह चोरी लगभग 5 से 7 करोड़ रुपये की है। दान की चोरी के मामले पर सरकार और अयोध्या मंदिर प्रशासन की चुप्पी को संदिग्ध बताया है। प्रकरण को लेकर मांग की है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय इस मुद्दे पर सच्चाई सामने रखें और प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए “करोड़ों रुपए के दान की चोरी” इसे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठ रही है।
इस संदर्भ में सपा नेता पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने `दोपहर का सामना’ को बताया कि मंदिर में जो चढ़ावा चढ़ता था वह बैंक में जमा होता था। कहीं से खबर मिली कि पिछले दिनों का चढ़ावा जब बैंक में जमा होने गया तो अनुमानित औसत से कुछ कम था। फिर जब इसके जांच की बात की गयी तो सरकार सन्नाटे में आ गयी। इस बीच खबर मिली कि राम मंदिर ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय एफआईआर कराने जा रहे हैं, लेकिन किसी कारण से उन्होंने एफआईआर नहीं कराया। उन्होंने बताया कि मैंने जब जमीन घोटाले की बात उठायी थी, तब नागपुर संघ कार्यालय से एक गोपाल नाम के व्यक्ति को यहां लगा दिया गया था। वह व्यक्ति भी इस समय नहीं दिख रहा है। इस बीच एसपी सुरक्षा रामजन्मभूमि से बात करने की कोशिश की गई तो उनका सीयूजी नम्बर स्विच ऑफ आया। जबकि चंपत राय के नम्बर पर रिंग जा रही है, लेकिन फोन उठा नहीं। एक अन्य ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र से भी संपर्क करने की कोशिश की गयी, लेकिन रिंग जाने के बाद भी बात संभव नहीं हो पायी। इस संदर्भ में प्रभारी थाना रामजन्मभूमि ने बताया कि अभी तक उनको कोई शिकायत नहीं मिली है। बताते हैं कि इस तरह की बातों से महामंत्री राम मंदिर ट्रस्ट चंपत राय बहुत आहत हैं। वह हर हाल में मामले की गहन जांच चाहते हैं।
श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट मामला…आरोपों पर चंपत राय का बयान…”सभी की जानकारी हेतु”
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का समय समय पर आंतरिक ऑडिट होता है। इस कार्य में ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के प्रतिनिधि सम्मिलित रहते हैं। ऑडिट कार्य कई दिन तक चलता है, वही कार्य आजकल हो रहा है। अभी तक कोई उल्लेखनीय बात सामने नहीं आयी है।
