सामना संवाददाता / नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु सहित पांच राज्यों के चुनाव परिणामों के बाद `इंडिया’ गठबंधन ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक रणनीति को मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है। इसी सिलसिले में सोमवार को दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। संविधान क्लब में होनेवाली इस बैठक में २३ राजनीतिक दलों के नेता शामिल होंगे। इस अवसर पर विपक्षी दलों की एकजुटता का प्रदर्शन देखने को मिलेगा। शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में हिस्सा लेंगे।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बैठक की विस्तृत जानकारी दी। उनके अनुसार, यह बैठक दोपहर १२ बजे आयोजित होगी। बैठक में देश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति, मोदी सरकार के कामकाज तथा राष्ट्रीय हित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जाएगी और आगे की रणनीति तय की जाएगी। इसी संदर्भ में तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी रविवार को ही दिल्ली पहुंच गई हैं।
गठबंधन नहीं, ‘इंडिया जनबंधन’
आज दिल्ली में होनेवाली बैठक की जानकारी देते हुए जयराम रमेश ने ‘इंडिया जनबंधन’ शब्द का प्रयोग किया है। उन्होंने कहा कि यह ‘इंडिया जनबंधन’ की बैठक है और जिस प्रकार भारत की पहचान विविधता में एकता की है, उसी प्रकार इंडिया जनबंधन भी विभिन्न राजनीतिक दलों को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है। उनके इस शब्द प्रयोग की राजनीतिक गलियारों में व्यापक चर्चा हो रही है।
उद्धव ठाकरे को वेणुगोपाल का फोन
`इंडिया गठबंधन की बैठक का निमंत्रण देने के लिए राष्ट्रीय कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने उद्धव ठाकरे से फोन पर संपर्क किया था। यह जानकारी देते हुए शिवसेना नेता व सांसद संजय राऊत ने कहा कि उद्धव ठाकरे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल होंगे।
‘टीवीके’ पर भी होगी चर्चा
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद वहां राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिला। पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन के नेतृत्ववाली द्रमुक (डीएमके) को पराजय का सामना करना पड़ा, जबकि अभिनेता विजय दलपति की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (टीवीके) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। परिस्थितियों को देखते हुए कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने का निर्णय लिया। इसके बाद डीएमके ने `इंडिया’ गठबंधन से दूरी बना ली है और वह सोमवार की बैठक में शामिल नहीं होगी। ऐसे में टीवीके को इंडिया गठबंधन में शामिल करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा होने की संभावना है।
इन मुद्दों पर होगी चर्चा
– चुनावों में कथित मतों की चोरी
-संविधान पर आए दिन हो रहे हमले
– विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई और दमन
– बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी
– निवेश के लिए प्रतिकूल माहौल
– मनमानी तथा राष्ट्रविरोधी विदेश नीति व निर्णय
