सामना संवाददाता / मुंबई
सुप्रसिद्ध साहित्यिक संस्था स्वर संगम फाउंडेशन ने अपना चौथा कबीर महोत्सव मीरा रोड के विरुंगला केंद्र में मनाया। बता दें कि पिछले तीन वर्षों से ‘स्वर संगम फाउंडेशन’ कबीर महोत्सव मनाता आ रहा है।
कबीर महोत्सव के इस बार के गायक कलाकार थे हिंदी व मराठी के प्रसिद्ध रचनाकार व गायक दीपक खेर। दीपक खेर के साथ तबले पर संगति दी श्री पिसाट ने और हारमोनियम पर मोहक प्रस्तुति दी किरण म्हात्रे ने।
कार्यक्रम की शुरुआत संस्था के सचिव डॉ. हरिप्रसाद राय ने की। उन्होंने क्रमशः दीपक खेर, संतोष पिसाट और किरण म्हात्रे का शाल और पुष्पगुच्छ देकर स्वागत व सम्मान किया।
गायन के पूर्व कवि रमन मिश्र ने कराची के प्रसिद्ध सूफी-कव्वाल गायक उस्ताद फरीद अयाज खान तथा पंडित कुमार गंधर्व के संस्मरण सुनाए।
उन्होंने कहा कि शबनम बीरवानी से बातचीत के दौरान उस्ताद फरीद ने बताया कि कबीर रंजन के लिए नहीं हैं, वे प्रबोधन, जागरण और मुक्ति के उद्गाता हैं। कबीर को गाया नहीं, अपितु कबीर को जिया जाता है। जो कबीर को जीवन की धड़कन की तरह महसूस करता है, जिसमें कबीर स्पंदित हों, वही कबीर को गा सकता है।
तत्पश्चात रमन मिश्र ने कुमार गंधर्व के एक रोचक प्रसंग का जिक्र करते हुए कहा कि जब कुमार गंधर्व अपनी फेफड़ों की बीमारी से बेहद निराश हो गए थे, तब निराशा के तमस में उन्होंने मालवा के लोकगीतों को सुनने का उपक्रम किया। मालवा के लोकगीतों को सुनने की प्रक्रिया में सहसा कबीर टकरा गए और कबीर टकराए ही नहीं, मन और चेतना में समा गए। और जब वे कबीर को सुनने-गुनने लगे, तब लगा कि कबीर ने उनकी आत्मा में जन्म ले लिया है। आरोग्य प्राप्त करने के बाद उन्होंने कहा कि बीमारी और निराशा के समय जो कबीर कुछ वर्ष पूर्व उनकी आत्मा में पैदा हुआ था, अब वह जवान हो गया है। यहां कबीर ही नहीं जवान हुए, स्वयं कुमार गंधर्व भी हुए।
बाद में दीपक खेर व उनके साथियों द्वारा कबीर के पदों और साखियों की खूबसूरत सांगीतिक प्रस्तुति की गई, जिसे देर रात तक श्रोताओं ने मंत्रमुग्ध होकर सुना और सराहा। कमलेश शर्मा की छोटी, पर बहुत ही उल्लेखनीय टिप्पणी भी खूब सराही गई। स्वर संगम फाउंडेशन वरिष्ठ व युवा लेखकों को हमेशा समान महत्व देता रहा है। कमलेश की टिप्पणी उसी कड़ी में सराहनीय थी। संस्था के अध्यक्ष हृदयेश मयंक ने उपस्थितों के प्रति आभार प्रकट किया। दीपक खेर व उनके साथियों ने अपनी प्रस्तुति से पुनः सबका दिल जीत लिया।
