मुख्यपृष्ठस्तंभयोगी सरकार से करोगे सवाल तो भेज दिए जाओगे जेल

योगी सरकार से करोगे सवाल तो भेज दिए जाओगे जेल

-दुग्ध व्यवसायी ओमन की हत्या पर सवाल पूछने पर पूर्व चेयरमैन के खिलाफ FIR…आरोप के 24 घंटे बाद मुख्य आरोपी के पैर में गोली मारकर गिरफ्तारी

मंगलेश्वर (मुन्ना) त्रिपाठी / गाजियाबाद

सूर्या हत्याकांड में 24 घंटे में एनकाउंटर और बुलडोजर चलाने वाली गाजियाबाद पुलिस लोनी के दुग्ध व्यवसायी ओमकार उर्फ ओमन की हत्या के 9 दिन बाद भी शव तक बरामद नहीं कर पाई है। लेकिन सवाल उठाने वाले पूर्व चेयरमैन मनोज धामा पर 24 घंटे के भीतर BNS की धारा 353(2), 356(2) के तहत FIR दर्ज कर दी गई।
आरोप के 24 घंटे बाद ‘एनकाउंटर’…9 दिन बाद भी शव नहीं
राष्ट्रीय लोक दल नेता और पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष मनोज धामा ने वीडियो जारी कर पुलिस से पूछा था, “सूर्या केस में ताबड़तोड़ कार्रवाई, यहां 9 दिन में मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं? क्या आरोपी BJP विधायक नंद किशोर गुर्जर के गांव के हैं, इसलिए पुलिस नाकाम है?”
धामा के इस आरोप के 24 घंटे बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी गौरव को मुठभेड़ में दोनों पैर में गोली मारकर गिरफ्तार कर लिया। हैरानी की बात यह है कि 9 दिन तक फरार बताए जा रहे आरोपी को धामा के वीडियो के अगले ही दिन पकड़ लिया गया, मगर 9 दिन बीतने के बाद भी ओमकार का शव बरामद नहीं हुआ है।
4 जून को गनोली निवासी अनुज की तहरीर पर सिर्फ मनोज धामा पर मुकदमा लिखा गया। वर्तमान नगरपालिका अध्यक्ष रंजिता धामा RLD नेता मनोज धामा की पत्नी हैं। FIR के बाद से मनोज धामा सार्वजनिक रूप से खामोश हैं।
वीडियो पर FIR, वायरल वीडियो पर चुप्पी क्यों?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि गाजियाबाद मामले में पुलिसिया कार्रवाई की आलोचना करते सैकड़ों वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं, मगर FIR सिर्फ धामा के खिलाफ हुई। वहीं विधायक नंद किशोर गुर्जर के SHO का कान पकड़ने, कॉलर पकड़कर गाली देने के वीडियो भी वायरल हो चुके हैं, पर पुलिस ने उन पर कोई संज्ञान नहीं लिया। सवाल उठता है कि आलोचना करने वाला नेता अपराधी और पुलिस से बदतमीजी करने वाला विधायक बेकसूर कैसे?
9 दिन में दो मौतें, परिवार ने दिया अल्टीमेटम
ओमकार का शव न मिलने से आक्रोशित परिजनों ने बंथला-चिरोडी मार्ग जाम किया था। इसी बीच शनिवार को सदमे से ओमकार के भाई हरीश की मेरठ में हार्ट अटैक से मौत हो गई। 9 दिन में एक ही घर से दो अर्थियां उठीं। टूट चुके परिजनों ने प्रशासन को दो दिन का अल्टीमेटम दिया है-शव बरामद कर आरोपियों को पकड़ा नहीं गया तो महापंचायत कर दोबारा धरना शुरू होगा।
विरोध की सजा : पहले जेल, फिर बरी
नाम न छापने की शर्त पर नागरिकों ने आरोप लगाया कि विधायक नंद किशोर गुर्जर के विरोधियों पर सिलसिलेवार केस दर्ज होते हैं। ताजा उदाहरण हिंदू संगठन नेता करण सिंह गुर्जर पर रेप का फर्जी केस दर्ज हुआ, वह आज भी जेल में हैं। पूर्व में मनोज धामा समेत 5 अन्य पर भी इसी पैटर्न के केस दर्ज हुए-सब जेल गए और अदालत से बाइज्जत बरी हुए।
स्थानीय लोगों का कहना है, “पैटर्न साफ है-आवाज उठाओ, FIR झेलो। फर्जी केस लिखने वाले दारोगा पर आज तक कार्रवाई नहीं हुई।”
‘ईमानदार अफसरों’ के राज में सियासी FIR का खेल
पुलिस आयुक्त रविंद्र गौड़, अपर आयुक्त केशव चौधरी, राजकरण नैय्यर, IPS सुरेंद्र तिवारी और धवल जायसवाल की छवि ईमानदार मानी जाती है। फिर भी उनके कमिश्नरेट में एक ही थाने से राजनीतिक FIR क्यों कट रही हैं?
लोग पूछ रहे हैं कि क्या वरिष्ठ अफसरों तक विधायक के कथित अत्याचार और फर्जी मुकदमों की जानकारी नहीं पहुंच रही? या जानकारी के बाद भी सियासी दबाव के आगे वे कार्रवाई से बच रहे हैं?
दो केस, दो मापदंड
सूर्या हत्याकांड: 24 घंटे में एनकाउंटर, आरोपी ढेर, अवैध निर्माण पर बुलडोजर।
ओमकार हत्याकांड: सवाल उठाने पर 24 घंटे में FIR, आरोप के 24 घंटे बाद मुख्य आरोपी के पैर में गोली, पर 9 दिन में शव बरामद नहीं।
फर्क सिर्फ इतना कि ओमकार केस में आरोप विधायक नंद किशोर गुर्जर के करीबी लोगों पर हैं। क्या गाजियाबाद पुलिस की बंदूक सवाल पूछने के बाद ही चलती है?
पुलिस का पक्ष
लोनी पुलिस का कहना है कि मुख्य आरोपी गौरव को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया है। ओमकार हत्याकांड की जांच जारी है। शव बरामदगी के लिए कई टीमें लगी हैं। मनोज धामा पर FIR तहरीर के आधार पर कानूनी प्रक्रिया के तहत दर्ज हुई है। BJP विधायक नंद किशोर गुर्जर का इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
5 अनुत्तरित सवाल जो सिस्टम को कठघरे में खड़ा करते हैं
1. 9 दिन बाद भी ओमकार का शव क्यों नहीं मिला, जबकि मुख्य आरोपी गिरफ्तार हो चुका है?
2. मनोज धामा के आरोप के 24 घंटे बाद ही आरोपी कैसे पकड़ा गया, पहले 9 दिन पुलिस क्या कर रही थी?
3. सैकड़ों आलोचनात्मक वीडियो वायरल हैं, पर FIR सिर्फ मनोज धामा पर क्यों?
4. विधायक नंद किशोर गुर्जर फर्जी केस और पुलिस से बदतमीजी के वायरल वीडियो पर चुप क्यों हैं?
5. अदालत से बरी होने के बाद फर्जी FIR लिखने वाले विवेचकों पर विभागीय कार्रवाई कब होगी?
लोनी में आज न्याय कानून की किताब से नहीं, सत्ता के गलियारे से तय होता दिख रहा है। एक तरफ पीड़ित परिवार दो लाशों के साथ इंसाफ के लिए सड़क पर है, दूसरी तरफ पुलिस आलोचकों की आवाज दबाने में मुस्तैदी दिखा रही है। जब ‘ईमानदार’ कहे जाने वाले अफसर भी इस सिस्टम के आगे बेबस नजर आएं, तो आम आदमी किस दरवाजे पर न्याय के लिए दस्तक दे?

अन्य समाचार