मुख्यपृष्ठखेलआउट ऑफ पवेलियन: फैन हो तो ऐसा 

आउट ऑफ पवेलियन: फैन हो तो ऐसा 

अमिताभ श्रीवास्तव

-महिलाएं अपने इन करतबों के साथ यह भी बता रही हैं कि यह खेल केवल पुरुषों का ही नहीं है बल्कि महिलाएं भी इसे उसी जज्बे के साथ खेलती हैं।

-इसने लॉस एंजेल्स से बोस्टन तक ४,००० किलोमीटर से ज्यादा की दूरी पैदल तय की है यह वायरल सनसनी बन चुका है।

बात जब फुटबॉल विश्वकप की हो तो दुनियाभर के फैंस व दर्शकों का हुजूम उमड़ पड़ता है। इनमें से कुछ ऐसे खास होते हैं जिन्हें दुनिया देखकर आश्चर्य करती है। जी हां, अपने-अपने देशों का समर्थन करने के लिए दुनिया के हर कोने से उनके प्रशंसक आते हैं। अब देखिए न एक फैन है जो २२ साल का एक स्कॉटलैंड फैन है। इसने लॉस एंजेल्स से बोस्टन तक ४,००० किलोमीटर से ज्यादा की दूरी पैदल तय की है यह वायरल सनसनी बन चुका है। इसके अलावा इसका एक वीडियो भी था जिसमें एक बतख मैक्सिको की जर्सी पहनकर घूम रही थी। जी हां, इंटरनेट ने ऐसा ही एक और वायरल फैन ढूंढा, इस बार तुर्की से। इस फैन का निकनेम उदी नेको (असली नाम: नेसदेत ओल्चेरमान) है और वह बेसिक्तास क्लब और तुर्की राष्ट्रीय टीम का समर्थक है। तुर्की और ऑस्ट्रेलिया के बीच मैच में गैलरी में उनका अनोखा अंदाज देखकर इंटरनेट दीवाना हो गया। ओल्चेरमान अपने चेहरे को गहरे काले रंग में रंगते हैं, सिवाय अपने बालों और दाढ़ी के, जिन्हें वह सफेद रंग में रंगते हैं, ताकि अपनी टीम का समर्थन कर सकें, जिनके मुख्य रंग काला और सफेद हैं। वह तुर्की जेंडरमेरी के पूर्व सदस्य भी रह चुके हैं, जो एक राष्ट्रीय सैन्य-कानून प्रवर्तन एजेंसी है और उन्होंने बेसिक्तास के अध्यक्ष हसन अरात से भी मुलाकात की है। उनका सोशल मीडिया पर बड़ा प्रभाव है और उन्हें अधिकांश बेसक्तास और तुर्की राष्ट्रीय टीम के मैचों में देखा जाता है।
ब्राजील की सड़कों पर विश्वकप
पांच बार की विश्व कप विजेता ब्राजील ने अपना पहला मैच मोरक्को के खिलाफ ड्रा खेला मगर ब्राजील की सड़कों पर विश्व कप चल रहा है। जी हां, मैक्सिको सिटी के मैदान के बाहर भी फुटबॉल की कलाकारी चल रही है। ब्राजील में जो मेक्सिको का पड़ोसी है, महिलाओं ने स्ट्रीट फुटबॉल का एक अनोखा तरीका अपनाया है, उन्होंने संतुलन के असली प्रदर्शन को कुछ इस तरह दर्शाया है जिसे देखकर कोई भी दांतों तले उंगली दबा सकता है। यह होता है फुटबॉल का बुखार। महिलाएं अपने इन करतबों के साथ यह भी बता रही हैं कि यह खेल केवल पुरुषों का ही नहीं है बल्कि महिलाएं भी इसे उसी जज्बे के साथ खेलती हैं। फीफा वर्ल्ड कप एक बड़ा खेल आयोजन है जो हर चार साल में सिर्फ एक बार होता है, आज खबरों में छाया हुआ है। लाखों दर्शक और फैंस टूर्नामेंट को ऐसे फॉलो करते हैं जैसे उनकी जिंदगी इससे जुड़ी हो, वहीं महिलाओं का विश्वकप संस्करण उतना कवरेज नहीं पाता और लगभग अनदेखा रह जाता है। शायद यही वजह है कि ब्राजील की सड़कों पर इन दिनों महिलाएं फुटबॉल के करिश्माई अंदाज को प्रस्तुत करती दिख रही हैं। जो उनके विश्वकप को नापसंद करने वाले लोगों के लिए एक तरह से ताना है।

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