मुख्यपृष्ठस्तंभफलसफा : पेड़ फल आने पर झुकते हैं, इंसान क्यों नहीं?

फलसफा : पेड़ फल आने पर झुकते हैं, इंसान क्यों नहीं?

सना खान

एक गांव में एक बूढ़ा माली रहता था। उसने अपने बगीचे में कई तरह के पेड़ लगाए थे। वर्षों की मेहनत के बाद पेड़ बड़े हुए और उनमें फल आने लगे। एक दिन उसका पोता बगीचे में घूम रहा था। उसने देखा कि जिन पेड़ों पर सबसे अधिक फल लगे थे, उनकी शाखाएं नीचे की ओर झुकी हुई थीं। वहीं कुछ पेड़ सीधे खड़े थे, क्योंकि उन पर फल नहीं थे। पोते ने उत्सुकता से दादा से पूछा, ‘दादा, फल वाले पेड़ झुके हुए क्यों हैं और खाली पेड़ सीधे क्यों खड़े हैं?’ माली मुस्कुराया और बोला, ‘बेटा, प्रकृति हमें हर दिन कुछ न कुछ सिखाती है। जिन पेड़ों पर फल लगते हैं, वे अपने भार और उपयोगिता के कारण झुक जाते हैं। लेकिन जिन पर कुछ नहीं होता, वे अकड़कर खड़े रहते हैं।’ बच्चा कुछ समझा, कुछ नहीं। तब दादा ने कहा, ‘यही बात इंसानों पर भी लागू होती है। जिन लोगों के पास ज्ञान, अनुभव और उपलब्धियां होती हैं, वे अक्सर विनम्र होते हैं। उन्हें अपनी काबिलियत का शोर मचाने की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन जिनके पास दिखाने के लिए कम होता है, वे कई बार अपने अहंकार को ही अपनी पहचान बना लेते हैं।’ उस दिन बच्चे ने पेड़ों को एक नई नजर से देखा। जीवन में सफलता, पद, धन और सम्मान मिलना अच्छी बात है, लेकिन उससे भी बड़ी बात है विनम्र बने रहना। क्योंकि ऊंचाई पर पहुंचकर झुकना ही महानता की पहचान है। जो व्यक्ति जितना बड़ा होता है, उसका व्यवहार उतना ही सरल और सौम्य होता है।
फलसफा यही है कि प्रकृति के नियम इंसानों पर भी लागू होते हैं। पेड़ फल आने पर झुक जाते हैं, क्योंकि वे देने वाले बन जाते हैं। इंसान भी जब देने वाला बन जाए, तो उसके भीतर का अहंकार अपने आप झुक जाता है।
फलों से लदे पेड़ झुक जाया करते हैं,
खाली दरख्त ही अकड़ दिखाया करते हैं।
जो बुलंदियों पर पहुंचकर भी सिर झुकाया करते हैं,
लोग अक्सर उन्हीं का सम्मान किया करते हैं।

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