राजू पाण्डे / उत्तराखंड
नैनीताल- उत्तराखंड की समृद्ध पारंपरिक रिंगाल कला के संरक्षण और संवर्धन में नैनीताल की महिलाएं अहम भूमिका निभा रही हैं।
नैनीताल से सटे चारखेत गांव में करीब 3 दर्जन से अधिक महिलाओं को मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के तहत कृषि विभाग, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से बांस यानी रिंगाल से टोकरी और अन्य हस्तशिल्प उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ने के उद्देश्य से विलुप्त होती पारंपरिक कला को जीवंत रखने के साथ आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप सुंदर-आकर्षक वस्तुएं तैयार करने के गुर सिखाए जा रहे हैं।
रिंगाल के पुश्तैनी काम को वर्षों से आगे बढ़ाने में जी-जान से जुटे हस्तशिल्पी बालकिशन महिलाओं को ताने और बाने के लिए रिंगाल को अलग-अलग चौड़ाई में काटने के साथ ही टोकरी, डलिया, पेन स्टैंड, डस्टबिन, लैंप व फाइल कवर के अलावा अन्य सजावटी सामान बनाने के गुर सिखाकर पारंगत कर रहे हैं।
महिलाओं को स्थानीय स्तर पर आय अर्जित करने और ग्रामीण पारंपरिक शिल्पकला से जोड़ते हुए स्वरोजगार के अवसर देने के लिए विभागीय स्तर पर हर तरीके से सारी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा उनके द्वारा बनाए गए उत्पादों के लिए सुलभ बाजार मुहैया कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।
आपको बता दें कि उत्तराखंड के हस्तशिल्पी पुरातन काल से रिंगाल और बांस का उपयोग करते रहे हैं। पहले लोग रिंगाल से डोका, सूप, मोस्टा, डलिया, बच्चों को झुलाने वाला चौवर सहित अन्य चीजें बनाते थे। समय के साथ इसकी चलन कम होती गई। इसी समृद्ध कला को एक बार फिर से जीवंत करने के लिए पहाड़ की महिलाओं को इस गौरवशाली कला से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
