मुख्यपृष्ठस्तंभतड़का- मंदिरों में चोरी : दोषियों को ठोको

तड़का- मंदिरों में चोरी : दोषियों को ठोको

कविता श्रीवास्तव

देश के करोड़ों लोगों की आस्था मंदिरों से जुड़ी हुई है। मंदिर हमारी पूजा-अर्चना के पवित्र स्थान हैं। वे सनातन संस्कृति, परंपरा और सामाजिक विश्वास के केंद्र हैं। जब भी मंदिरों में चोरी, दानराशि में गड़बड़ी या प्रबंधन संबंधी अनियमितताओं के आरोप सामने आते हैं तो यह केवल एक अपराधिक घटना नहीं होती है, बल्कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है। इन दिनों अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में दानपेटी से धन चोरी होने का मामला चर्चा में है। मंदिर निर्माण और प्रबंधन को लेकर भी कुछ लोगों ने विभिन्न प्रकार के आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर, मथुरा के मंदिर में चोरी की खबरें हैं। मथुरा-वृंदावन के कुछ मंदिरों में चोरी और सुरक्षा में सेंध लगाने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। इसीलिए सवाल उठता है कि क्या देश के बड़े और प्रतिष्ठित मंदिरों की सुरक्षा तथा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है? फिलहाल अयोध्या मामले में एसआईटी जांच कर रही है। देखना होगा कि यह जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावी हो। किसी व्यक्ति का पद, प्रतिष्ठा, राजनीतिक प्रभाव या सामाजिक हैसियत जांच के रास्ते में बाधा न बने। यदि चोरी हुई है या किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो, सख्ती से पूछताछ हो और दोषियों पर कानून के अनुसार कार्रवाई हो। वहीं यदि लगाए गए आरोप गलत साबित होते हैं तो यह भी जांच होनी चाहिए कि आरोप लगाने के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं। इन घटनाओं के बीच कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर महाराज की वह मांग भी चर्चा में है, जिसमें उन्होंने पूरे देश के मंदिरों के संचालन और प्रबंधन के लिए एक ‘सनातन बोर्ड’ के गठन की बात कही है। उनका तर्क है कि मंदिरों के प्रबंधन और प्रशासन, दानराशि के उपयोग, संपत्तियों की सुरक्षा और धार्मिक गतिविधियों के संचालन के लिए एक स्वतंत्र और जवाबदेह व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। इससे मंदिरों के संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और दान की राशि धर्म, शिक्षा, सेवा तथा समाज कल्याण के कार्यों में अधिक पारदर्शिता के साथ काम में लायी जा सकती है। आज मंदिरों के प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही और आधुनिक तकनीक की आवश्यकता बढ़ गई है। हाई-टेक सीसीटीवी नेटवर्क, डिजिटल दान प्रणाली, नियमित ऑडिट, स्वतंत्र निगरानी तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाकर ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
मंदिर आस्था, पवित्रता और विश्वास के प्रतीक हैं। इसलिए उन्हें विवाद, भ्रष्टाचार, चोरी और अव्यवस्था से दूर रखना पूरे समाज की जिम्मेदारी है। आवश्यकता इस बात की है कि सभी आरोपों और घटनाओं की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों को सजा मिले और ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिससे भविष्य में किसी भी मंदिर की गरिमा पर सवाल खड़े न हों। श्रद्धालुओं का विश्वास ही मंदिरों की सबसे बड़ी पूंजी है और उसकी रक्षा हर हाल में की जानी चाहिए।

अन्य समाचार