सुबह के ठीक पौने आठ बजे हैं। छत्तीसगढ़ के एक सरकारी स्कूल के मैदान में सैकड़ों बच्चे कतारों में खड़े हैं। उमस भरी गर्मी में अचानक माइक पर एक गंभीर आवाज गूंजती है। राष्ट्रगान और राज्य गीत के बाद, अब लाउडस्पीकर से ‘दीप मंत्र’ और ‘सरस्वती वंदना’ के संस्कृत श्लोक हवा में तैरने लगते हैं। कुछ बच्चे आंखें बंद किए हाथ जोड़े खड़े हैं, तो कुछ की नजरें इस नए नियम के असमंजस में अपनी हथेलियों को ताक रही हैं। यह सिर्फ एक आम प्रार्थना सभा नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की स्कूली शिक्षा में आए उस बड़े बदलाव की पहली दस्तक है, जिसने पूरे प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है।
छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार द्वारा लागू किए गए इस नए नियम के तहत अब राज्य के सरकारी और निजी स्कूलों में दिन में तीन बार, सुबह प्रार्थना के वक्त सरस्वती वंदना, दोपहर में मध्याह्न भोजन से पहले ‘भोजन मंत्र’ और छुट्टी के समय ‘गायत्री मंत्र’ व ‘शांति मंत्र’ का पाठ अनिवार्य कर दिया गया है। इसी नए बदलाव को मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने ‘स्कूलों में आरएसएस की सेंध’ करार दिया है।
कांग्रेस के कड़े विरोध की वजहें
कांग्रेस ने इस सरकारी आदेश के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे सीधे तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा को थोपने का प्रयास बताया है। इसके पीछे कांग्रेस ने निम्नलिखित मुख्य तर्क दिए हैं:
संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता पर चोट
कांग्रेस का कहना है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है और सरकारी स्कूलों में हर धर्म व समुदाय के बच्चे शिक्षा लेने आते हैं। किसी एक धर्म विशेष के मंत्रों और श्लोकों को सभी बच्चों के लिए अनिवार्य करना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
मूल मुद्दों से भटकाने की राजनीति
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, प्रदेश के स्कूल जर्जर भवनों, शिक्षकों की भारी कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। सरकार इन असल समस्याओं को हल करने में नाकाम रही है, इसलिए जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के सांस्कृतिक और धार्मिक विवाद खड़े किए जा रहे हैं। जहां एक तरफ भाजपा सरकार और शिक्षा विभाग का दावा है कि इस नियम से बच्चों में नैतिक मूल्यों, देशभक्ति और भारतीय संस्कृति का विकास होगा, वहीं कांग्रेस इसे शिक्षा के भाजपाकरण के रूप में देख रही है। स्कूल के शांत मैदान से उठी यह प्रार्थना अब प्रदेश के सियासी गलियारों में एक बड़े वैचारिक युद्ध का रूप ले चुकी है।
शिशु मंदिर मॉडल थोपने का आरोप
कांग्रेस प्रवक्ताओं का सीधा आरोप है कि भाजपा सरकार सरकारी शिक्षण संस्थानों को आरएसएस द्वारा संचालित ‘सरस्वती शिशु मंदिर’ के सांचे में ढालना चाहती है। विपक्ष का तर्क है कि यदि आज एक धर्म के मंत्र अनिवार्य किए जा रहे हैं, तो कल अन्य समुदायों से भी अपनी धार्मिक किताबों (जैसे कुरान, बाइबिल) के पाठ की मांग उठेगी, जिससे स्कूलों का सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है।
