मुख्यपृष्ठसमाचारखतरे में मुंबई की सुरक्षा!

खतरे में मुंबई की सुरक्षा!

-बंद होने के कगार पर शहर के सीसीटीवी

-सरकार के पास २७.२३ करोड़ का बिल बकाया

-गृह विभाग से गिड़गिड़ा रहा है कंगाल एमटीएनएल

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई पर २६/११ के आतंकी हमलों के बाद, राज्य सरकार के होम डिपार्टमेंट ने ‘मुंबई सिटी सर्विलांस’ प्रोजेक्ट लागू करने का फैसला किया था। यह प्रोजेक्ट मुंबई पुलिस की मदद से लागू किया जा रहा है और इसके लिए शहर में सीसीटीवी लगाने का काम शुरू किया गया था। इस प्रोजेक्ट का मुख्य मकसद शहर की बड़ी सड़कों, चौराहों, रेलवे स्टेशन एरिया, बीच और सेंसिटिव इलाकों को सीसीटीवी कैमरे के दायरे में लाना था।
जानकारी के मुताबिक, हजारों हाई-कैपेसिटी वाले एचडी कैमरे, पीडीजेड कैमरे और एनपीआर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने का पैâसला किया गया। इसके लिए एमटीएनएल के ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क की मदद ली गई। इसलिए, प्रोजेक्ट के पहले फेज के साथ-साथ दूसरे फेज में भी एमटीएनएल के नेटवर्क और बैंडविड्थ सुविधाओं का इस्तेमाल किया गया। आश्चर्य की बात तह है कि एमटीएनएल का राज्य सरकार के पास २७.२३ करोड़ रुपये का पेमेंट अभी बाकी है। खबर है कि एमटीएनएल ने राज्य सरकार के होम डिपार्टमेंट को एक लेटर भेजा है। माना जा रहा है कि लेटर में प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल हुए बैंडविड्थ के एरियर और कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। इसमें बताया गया है कि २७.२३ करोड़ रुपए का पेमेंट अभी बाकी है। यह भी बताया जाता है कि एमटीएनएल ने लेटर में एल एंड टी की मौजूदा ५,३७१ सीसीटीवी कैमरों के बकाया बिल का जिक्र किया है, जबकि सरकारी दस्तावेजों में ५,४४२ कैमरे होने का रिकार्ड है। ७१ कैमरों का कोई उल्लेख नहीं है, ऐसे में एमटीएनएल उक्त ७१ कैमरों का ७९.७५ लाख रुपए का बिल का पेंच फंसे होने की बात कर रही है। एमटीएनएल के सूत्रों का कहना है कि एमटीएनएल पहले से ही घाटे में चलते हुए कंगाली के दौर से गुजर रही है। कर्मचारियों को वेतन देने के लाले पड़े हुए हैं। ऐसी मुश्किल स्थित में अगर बकाया बिल नहीं मिला तो वह कभी हाथ खड़े कर सकती है और मुंबई के सारे सीसीटीवी कैमरे ठप पड़ सकते हैं।

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