एड. राजीव मिश्र / मुंबई
हरियाबौ रसोई से खरमेटाव लइके बाहर निकरी तो देखत है हरिया आगि जराइ के ओहिमा आलू भूंजत रहे। गोलुआ के बप्पा ई का करत हौ? काहें देखाय नही परत है आलू भूंजि रहा हई। अरे पर हम तो खरमेटाव लेवय घर मे तो गये रहे तब तुम्हरी जीभ जरय लागि। इहै…बस इहै तुम्हरी बात करेजा फारि देत है। अब यहिमा जीभ जरय वाली बात कहां से आइ गय। हां… तो जब १० मिनट अगोरि नही सकत रह्यौ तो जीभय जरत रही न? ससुरा हमार गरदन, हमार बापय काटि दिहिन, नाही तो एक से एक बियाह आवत रहे, पर किस्मत फूटि गय जवन अइसन मेहरारू मिली, नही तो परानपट्टी के परधान आवा रहे अपने बिटिया के बियाह खातिर, उनकर लड़की एकदम हीरोइन रही हीरोइन। ऊपर से एक ठो बोलेरो अउर पांच लाख रुपिया भी देत रहे। तो काहें नही कियो बिहाह? कइ लिहे होते, अइसा बतावत हौ जइसे हमके कछु पतय नही है। उ लड़की एक गोड़ से लंगड़ रही, ई बात के बताई अउर दूसर बात ओहिसे बियाह किये होते तो हमरी की नाय उ खरमेटाव नही बनावत बल्कि तू ओहिके गोड़ दबउता। हमका खुदय अइसन मनई मिला है कि जीयब अपाढ़ होइ गवा है। अरे हम इहै लड़िकन के मुंह जोहारित थ नाही तो कब का घर छोड़ि के चली गय होती। अरे चलो, रहय देव, हमहीं अइसन मनई ही तुमका झेलि सकत है दूसर केउ होत तो कब का घर से बहिरियाय देत। तब तक कउनउ ओर से लाठी टेकत पारो दाई आइ गइन, ई कवन गबरदल मचाये हौ हरिया? कुछउ नही दाई बस यहिका यहि घर में नही रहय के है। यहिका राज चाही राज। अब दाई हरियाबौ से पूछय अंदर गईं तो हरियाबौ छच्छोधार रोवत के दाई से सब हाल बताईं। पूरी बात सुनय के बाद दाई हरिया के पीठ पर दुइ लाठी दिहिन। मुंहझौसू, बहुरिया के बाहेर करिहौ? मारत-मारत मूंज कइ देबय। हरिया भौचकियाय के धाय पारो दाई के देखत है अउर धाय गोलुआ के माई के। उधर गोलुआ के माई अंचरा में मुस्कियात रसोई की तरफ अउर पारो दाई लाठी ढेंघत बाहर निकरि गयी।
