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ड्रिल के दम पर खिलाड़ियों का प्रदर्शन, भ्रष्ट खेल नीति के खिलाफ आजाद मैदान में हुंकार

मुंबई। खेल प्रतिभाओं की उपेक्षा और भ्रष्ट खेल नीतियों के विरोध में महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों खिलाड़ियों ने बुधवार को मुंबई के आजाद मैदान में अनोखे अंदाज में जोरदार प्रदर्शन किया। सफेद टी-शर्ट और सफेद हाफ पैंट पहने खिलाड़ियों ने मैदान में सामूहिक ड्रिल, व्यायाम और विभिन्न खेल गतिविधियों का प्रदर्शन कर सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया। खिलाड़ियों के इस अनूठे आंदोलन ने आम नागरिकों और दर्शकों का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

आजाद मैदान का नजारा किसी खेल प्रतियोगिता से कम नहीं था। मैदान में एक ओर जहां खिलाड़ियों की रोमांचक ड्रिल और अनुशासित प्रदर्शन देखने को मिला, वहीं दूसरी ओर सरकार की कथित भ्रष्ट खेल नीति और अधिकारियों की उदासीनता के खिलाफ खिलाड़ियों का आक्रोश भी खुलकर सामने आया। महाराष्ट्र के कई जिलों से आए खिलाड़ियों ने आरोप लगाया कि राज्य में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक योजनाएं तो बनाई गई हैं, लेकिन भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के कारण वास्तविक खिलाड़ियों तक इन योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।

प्रदर्शन का नेतृत्व संभाजीनगर की शिव छत्रपति पुरस्कार विजेता खिलाड़ी सुरेखाताई शिरसाठ के मार्गदर्शन में तथा राष्ट्रीय खेल प्रशिक्षक महेश इंदापुरे के नेतृत्व में किया जा रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। अर्जुन पुरस्कार और शिव छत्रपति पुरस्कार विजेता खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने की मांग वर्षों से लंबित है, जबकि खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और परीक्षकों को मिलने वाली छात्रवृत्ति और मानदेय भी बेहद कम है।

खिलाड़ियों ने सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। इनमें सीबीएसई बोर्ड के खिलाड़ियों को एसएससी बोर्ड की तरह ग्रेस मार्क्स देने, खेलों में आरक्षण को पांच प्रतिशत से बढ़ाकर दस प्रतिशत करने, शिव छत्रपति पुरस्कार विजेताओं को सीधे सरकारी नौकरी देने, खिलाड़ियों की छात्रवृत्ति दस हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये करने तथा प्रशिक्षण देने वाले शिक्षकों को दस हजार रुपये मानदेय देने की मांग प्रमुख है।

इसके अलावा महिला खिलाड़ियों के लिए ‘लड़की श्री योजना’ शुरू करने, खिलाड़ियों के लिए बीमा योजना लागू करने, खेल विभाग के उपनिदेशक सुहास पाटिल को पद से हटाने तथा प्रमाणपत्र सत्यापन प्रक्रिया 20 दिनों के भीतर पूरी करने जैसी मांगें भी आंदोलनकारियों ने उठाई हैं।

राष्ट्रीय खेल प्रशिक्षक महेश इंदापुरे ने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है, लेकिन यदि सरकार ने खिलाड़ियों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया और उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं किया तो आंदोलन और व्यापक तथा उग्र रूप धारण कर सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य के खिलाड़ियों को उनका अधिकार दिलाने के लिए यह संघर्ष जारी रहेगा।

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