सामना संवाददाता / नई दिल्ली
शिवसेना के ‘मशाल’ चुनाव चिह्न पर नौ सांसद लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। ऐसे में ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाया जाना चाहिए, जिससे संविधान की भावना या जनादेश का उल्लंघन हो। शिवसेना से अलग हुए सांसदों के मामले में निष्पक्ष और न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाया जाए।
शिवसेना के लोकसभा दल के नेता अरविंद सावंत और मुख्य सचेतक अनिल देसाई ने प्रतिनिधिमंडल के साथ नई दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर यह अनुरोध किया। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आश्वासन दिया कि संविधान और संसदीय नियमों के दायरे में रहकर ही निर्णय लिया जाएगा।
शिवसेना ने १८ जून को दिल्ली स्थित संसदीय दल कार्यालय में बैठक बुलाई थी। इस बैठक के लिए पार्टी के सभी नौ सांसदों को व्हिप जारी किया गया था। इस बीच, शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी एक पत्र देकर स्पष्ट किया है कि पार्टी किसी अन्य राजनीतिक दल में विलय नहीं कर रही है और भविष्य में भी किसी दल में शामिल होने का कोई विचार नहीं है। उन्होंने पत्र के माध्यम से पार्टी की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
शिवसेना से अलग होकर गए गुट को मान्यता नहीं दी जानी चाहिए। शिवसेना से अलग हुए सांसदों द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव हमें अवलोकन के लिए उपलब्ध कराया जाए, ऐसी मांग भी प्रतिनिधिमंडल ने की। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ने आश्वासन दिया कि इस मामले में संविधान और संसदीय नियमों के प्रावधानों का पालन करते हुए उचित कार्रवाई की जाएगी। यह जानकारी अरविंद सावंत और अनिल देसाई ने संयुक्त पत्रकार वार्ता में दी।
`शिवसेना के प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर मांग की कि पक्ष के सांसदों से जुड़े किसी भी मामले में संविधान और संसदीय परंपराओं के अनुरूप ही निर्णय लिया जाए। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ने आश्वासन दिया कि सभी निर्णय संविधान की मर्यादा और कानूनी प्रावधानों के तहत ही लिए जाएंगे।’
संवैधानिक और न्यायसंगत रुख अपनाया जाए -अरविंद सावंत
अरविंद सावंत ने कहा कि शिवसेना संसदीय दल द्वारा बुलाई गई बैठक में अनुपस्थित रहकर छह सांसदों ने पार्टी के व्हिप का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि भले ही उनकी संख्या दो-तिहाई हो, लेकिन हमारा भी एक पक्ष है। ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए, जिससे संविधान का उल्लंघन हो। हमने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया है कि इस मामले में संवैधानिक और न्यायसंगत रुख अपनाया जाए।
संविधान की भावना का पूरी तरह पालन हो – अनिल देसाई
अनिल देसाई ने कहा कि संविधान के प्रावधानों का पूरी तरह से पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की है और वह इस जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि संविधान की मर्यादा और उसके प्रावधानों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि जिन लोगों ने संविधान की भावना और प्रावधानों का उल्लंघन किया है, उन्हें किसी भी स्तर पर संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को किसी भी प्रकार का खतरा नहीं पहुंचना चाहिए।
