-मोबाइल में मिले विदेशी नंबर
फिरोज खान / मुंबई
मुहर्रम के जुलूस में जहरीला कैप्सूल बांटने वाले मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि पुणे में पेंट बनाने का कारोबार करने वाला आरोपी फैयाज प्रेमजी किसी अंतर्राष्ट्रीय साजिश का हिस्सा तो नहीं। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि कहीं आरोपी का इजरायल कनेक्शन तो नहीं, क्योंकि इजरायल-ईरान के बीच चली जंग के दौरान भारतीय शिया और सुन्नी मुसलमानों ने खुलकर ईरान का समर्थन किया था। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की २८ फरवरी २०२६ को तेहरान स्थित उनके कार्यालय में इजरायल ने हवाई हमले के दौरान हत्या कर दी थी। इस घटना का भी भारतीय शिया मुसलमानों ने कड़ा विरोध जताया था और इजरायल के विरोध में व अयातुल्ला अली खामेनेई के पक्ष में जगह-जगह जुलूस निकाले गए थे। इसके अलावा आरोपी के मोबाइल से कुछ विदेशी नंबर मिले हैं, जिसकी पुलिस गहराई से जांच कर रही है। मामले में एक और खास बात पता चली है कि आरोपी कई बार ईरान और इराक के चक्कर लगा चुका है।
बता दें कि शुक्रवार को भायखला में मुहर्रम जुलूस में शामिल लोगों को जिंक फॉस्फाइड वाली गोलियां बांटने के आरोप में ३९ साल के पैâयाज प्रेमजी को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में पता चला कि आरोपी करीब दो हफ्ते पहले शहर आया था और डोंगरी के एक सस्ते होटल में ठहरा था। इसके बाद उसने ऑनलाइन ३०,००० वैâप्सूल और ५० किलो जिंक फॉस्फाइड मंगवाया। एक अधिकारी ने बताया कि पूछताछ में पता चला कि वह इन गोलियों से १५,००० लोगों को मारना चाहता था। पुलिस ने उसके पास से जहर भरे १४,९०० वैâप्सूल जब्त किए हैं। जिंक फॉस्फाइड का इस्तेमाल अक्सर चूहों को मारने के जहर के तौर पर किया जाता है और यह इंसानों के लिए बहुत जहरीला हो सकता है। आरोपी पैâयाज प्रेमजी ने जुलूस में शामिल लोगों को ये गोलियां दर्द निवारक और इम्युनिटी बढ़ाने वाली दवा बताकर दी थीं। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि कम से कम १० लोगों ने ये गोलियां खाई थीं, लेकिन जहर के लक्षण दिखने के बाद सिर्फ दो लोग पुलिस के पास पहुंचे। पुलिस को शक है कि गोलियां खाने वाले लोगों की संख्या ज्यादा हो सकती है।
