उमेश गुप्ता / वाराणसी
अस्सी क्षेत्र स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में सोमवार को स्नान पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा, आस्था और भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का विधि-विधान से महाभिषेक किया गया। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और भक्तों ने गंगाजल से भगवान का स्नान कराकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
धार्मिक परंपरा के अनुसार स्नान पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों को विशेष दर्शन देते हैं। इसी क्रम में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को मंदिर की छत पर विराजमान किया गया, जहां से उन्होंने हजारों श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। भगवान के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा, जो देर रात तक जारी रहा।
वैदिक मंत्रोच्चार और जय जगन्नाथ के उद्घोष के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का गंगाजल से अभिषेक किया। मंदिर परिसर में पूरे दिन भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा। भक्तों ने फूल-माला, चंदन, प्रसाद और जल अर्पित कर भगवान से सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
दर्शन-पूजन के क्रम में पूर्व एमएलसी व श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष बृजेश सिंह अपनी पत्नी के साथ मंदिर पहुंचे और भगवान को जल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने परिवार एवं समाज के कल्याण की कामना करते हुए भगवान जगन्नाथ से सभी के मंगल की प्रार्थना की।
जगन्नाथ परंपरा में मान्यता है कि स्नान पूर्णिमा के दिन अत्यधिक जलाभिषेक और भक्तों के प्रेम से अभिभूत होकर भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ हो जाते हैं। इसके बाद वे 14 दिनों के अज्ञातवास (अनवसर काल) में चले जाते हैं। इस अवधि में भगवान के सार्वजनिक दर्शन बंद रहते हैं और उन्हें विशेष औषधीय भोग अर्पित किया जाता है।
मंदिर के पुजारियों के अनुसार इन 14 दिनों तक भगवान की विशेष सेवा और उपचार किया जाता है। इस दौरान उन्हें हल्के एवं औषधीय गुणों से युक्त भोग लगाया जाता है, जिससे वे स्वस्थ हो सकें।
अनवसर काल समाप्त होने के बाद भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों को नवयौवन दर्शन देंगे। इसके बाद भगवान डोली में सवार होकर नगर भ्रमण करेंगे और भक्तों के घर-घर पहुंचकर दर्शन देंगे। इस परंपरा का श्रद्धालुओं को पूरे वर्ष इंतजार रहता है।
स्नान पूर्णिमा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा श्वेत वस्त्रों में सुसज्जित होकर भक्तों को दर्शन दे रहे थे। भगवान के इस स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। अस्सी क्षेत्र के अलावा भदैनी, नगवा, शिवाला, सोनारपुरा और आसपास के इलाकों से भी लोग दर्शन के लिए पहुंचे।
सुबह से प्रारंभ हुआ दर्शन और जलाभिषेक का क्रम देर रात्रि तक चलता रहा। श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर भगवान के दर्शन किए और प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, शंखध्वनि और जयघोष से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा, जिसने दर्शनार्थियों को व्यवस्थित और सुगम दर्शन कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिसकर्मी लगातार भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए रहे, जिससे पूरे आयोजन के दौरान शांति और व्यवस्था कायम रही।
स्नान पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने स्वयं को धन्य महसूस किया और प्रभु से सुख, शांति एवं समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया।
