मुख्यपृष्ठसमाचारइंसान की जगह कभी नहीं ले सकता एआई- सिंह

इंसान की जगह कभी नहीं ले सकता एआई- सिंह

-महर्षि विद्या मंदिर में त्रिदिवसीय कार्यशाला

सामना संवाददाता / सुल्तानपुर

कमला नेहरू प्रौद्योगिकी संस्थान के कंप्यूटर विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. आर.के. सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कभी भी इंसानी दिमाग नहीं पा सकता। इसलिए वह कभी भी इंसानों की जगह नहीं ले पाएगा। वे सुल्तानपुर के महर्षि विद्या मंदिर में त्रिदिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। यह प्रशिक्षण 27 जून से 29 जून तक संचालित किया गया। प्रतिदिन कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानाचार्य जे.एन. उपाध्याय व मुख्य अतिथियों ने परंपरागत गुरु पूजा से की।
कार्यशाला में मुख्य अतिथि व मुख्य प्रशिक्षक के रूप में क्रमशः डॉ. पूनम मिश्रा, असिस्टेंट प्रोफेसर, आर.आर. पी.जी. कॉलेज, पीपरपुर, अमेठी; डॉ. हरिओम तिवारी, प्रवक्ता, जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान, सुल्तानपुर तथा डॉ. आर.के. सिंह, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, कंप्यूटर साइंस, कमला नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, सुलतानपुर ने क्रमशः राष्ट्रीय शिक्षा नीति के परिप्रेक्ष्य में विद्यार्थियों में स्वास्थ्य एवं कल्याण का प्रोत्साहन तथा नैतिक मूल्यों का विकास, भारतीय ज्ञान परंपरा एवं इसका आधुनिक शिक्षा में समावेश तथा एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की आवश्यकता, उपयोगिता व हानियों पर विस्तार से जानकारी दी।
मुख्य वक्ता डॉ. आर.के. सिंह ने एआई की उपयोगिता पर कहा कि यह वर्तमान की स्थिति को देखकर प्रतिक्रिया देता है। उन्होंने एआई के भविष्य के स्वरूप बताते हुए कहा कि यह इंसान की भावनाओं और विचारों को समझने का एक सशक्त माध्यम है, लेकिन याद रखें कि एआई के पास डेटा है, पर विवेक नहीं।
उन्होंने कहा कि एआई आत्मजागरूक करने का माध्यम बनेगा, जहां मशीनें व्यक्ति के संवेग, भावनाओं और चेतना को समझ सकेंगी। उन्होंने इसकी हानियों पर भी चर्चा करते हुए कहा कि इसमें रचनात्मक क्षमता नहीं होती और न ही भावनात्मक विकास होता है। यह सीखने की प्रक्रिया की नकल करता है और उतना ही बता सकता है, जितना डेटा उसके अंदर उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि यह भी सभी ध्यान में रखें कि एआई कभी मनुष्य का स्थान नहीं ले सकता, क्योंकि एआई को बनाने वाला भी मनुष्य ही है। यह आपके कार्यों को आसान कर सकता है, लेकिन मानव बुद्धि को पूर्णतः ग्रहण नहीं कर सकता।
कार्यक्रम के अंतिम सत्र में सभी शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं ने अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय देते हुए पिछले दो दिनों से संपादित कार्यशाला को विधिवत नाटक, काव्य, हास्य-व्यंग्य एवं अन्य तमाम विधाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया।
जिसमें भावातीत ध्यान के लाभ, शिक्षा के महत्व, भारतीय ज्ञान प्रणाली और उसके घटक तथा व्यावसायिक शिक्षा जैसे शीर्षक शामिल रहे। प्रधानाचार्य उपाध्याय ने प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए। कार्यक्रम का समापन भावातीत ध्यान एवं सिद्धि के सामूहिक अभ्यास से संपन्न हुआ।

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