उमेश गुप्ता / वाराणसी
वाराणसी के लंका क्षेत्र स्थित शिवाजी नगर कॉलोनी में श्री स्वामी नारायणानन्द तीर्थ वेद विद्यालय के संयोजकत्व में 51 बटुकों का उपनयन संस्कार वैदिक विधि-विधान, वेदमंत्रों के सस्वर उच्चारण एवं आचार्यगणों के निर्देशन में गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। यह आयोजन भारतीय वैदिक परम्पराओं, संस्कारों एवं सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण तथा भावी पीढ़ी में उनके संवर्धन की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस अवसर पर पूज्य डॉ. दिव्यचेतन ब्रह्मचारी गुरुजी का सान्निध्य एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ। उन्होंने अपने उद्बोधन में उपनयन संस्कार को भारतीय जीवन-दर्शन में आत्मानुशासन, ब्रह्मचर्य, ज्ञानार्जन तथा कर्तव्यपरायणता की औपचारिक दीक्षा बताते हुए बटुकों को वेदाध्ययन, संध्योपासना एवं सदाचारपूर्ण जीवन के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में विद्यालय के संरक्षक प्रो. श्रीकिशोर मिश्र एवं अध्यक्ष प्रो. रामनारायण द्विवेदी की विशिष्ट उपस्थिति एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त प्रबंध समिति के सदस्य सुनील पाठक, मदन मोहन पाण्डेय, दुष्यंत मिश्र, घनश्याम मिश्र, बब्बन चौबे तथा विद्यालय के आचार्य डॉ. जयन्तपति त्रिपाठी, शिवादत्त त्रिवेदी, शंकर प्रसाद गौतम, अमित कुमार पाण्डेय, रघुवर प्रसाद शुक्ल, योगेश तिवारी, विपुल शुक्ल, अजय अवस्थी, अवनीप द्विवेदी, श्रीनिवास इनामदार, अमरेश चंद्र पाण्डेय, पंकज दुबे, मनीष शंकर दुबे, स्मिता दुबे एवं सीता भट्ट तथा क्षेत्रीय सभासद महेंद्र पटेल सहित अनेक गणमान्य नागरिकों एवं शिक्षाविदों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
उपनयन संस्कार के उपरान्त बटुकों को वैदिक अध्ययन, आचार-व्यवहार की शुचिता, गुरु-सेवा, राष्ट्र एवं समाज के प्रति उत्तरदायित्व तथा सनातन सांस्कृतिक परम्पराओं के संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प दिलाया गया।
आए हुए अतिथियों का स्वागत स्वामी लखन स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। डॉ. वरुणेश चन्द्र दीक्षित ने इस अवसर पर उपस्थित सभी अतिथियों, अभिभावकों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी भारतीय ज्ञान-परम्परा एवं वैदिक संस्कारों के संवर्धन हेतु ऐसे आयोजनों के निरंतर संचालन का संकल्प व्यक्त किया।
