मुख्यपृष्ठसमाचारमरीजों का इलाज करनेवाले डॉक्टर खुद बीमार!

मरीजों का इलाज करनेवाले डॉक्टर खुद बीमार!

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र के सरकारी और निजी शिक्षण अस्पतालों में कार्यरत रेजिडेंट डॉक्टर असहनीय कार्यभार, लगातार लंबी ड्यूटी और पर्याप्त विश्राम के अभाव से जूझ रहे हैं। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन और सेंट्रल मार्ड के हालिया सर्वेक्षण ने अस्पतालों की चिंताजनक तस्वीर सामने रखी है। सर्वे में शामिल आधे से अधिक डॉक्टर प्रतिदिन १२ घंटे से ज्यादा काम कर रहे हैं। करीब ५३ प्रतिशत डॉक्टरों ने लगातार ३६ घंटे से अधिक ड्यूटी करने की बात कही, जबकि बड़ी संख्या में डॉक्टरों को इतनी लंबी पाली के बाद अनिवार्य विश्राम भी नहीं मिलता।
सर्वेक्षण में लगभग ७८ प्रतिशत रेजिडेंट डॉक्टरों ने नियमित या कभी-कभी अत्यधिक थकान और मानसिक दबाव महसूस करने की जानकारी दी। ८२ प्रतिशत से अधिक डॉक्टर नींद की कमी से परेशान पाए गए। लंबे समय तक बिना विश्राम के काम करने से केवल डॉक्टरों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य ही प्रभावित नहीं होता, बल्कि इलाज के दौरान निर्णय लेने की क्षमता, एकाग्रता और प्रतिक्रिया की गति भी कमजोर हो सकती है। इसका सीधा असर मरीजों की सुरक्षा पर पड़ता है।
रेजिडेंट डॉक्टर सरकारी अस्पतालों की रीढ़ माने जाते हैं। आपातकालीन विभाग, वॉर्ड, ऑपरेशन थिएटर और गहन चिकित्सा इकाइयों का बड़ा भार इन्हीं पर रहता है। डॉक्टरों की कमी, मरीजों की अत्यधिक संख्या और अव्यवस्थित ड्यूटी रोस्टर के कारण उन्हें कई बार लगातार दिन-रात काम करना पड़ता है।
संसदीय स्वास्थ्य समिति महज खानापूर्ति
संसदीय स्वास्थ्य समिति भी रेजिडेंट डॉक्टरों की ड्यूटी के घंटे सीमित करने और पर्याप्त विश्राम सुनिश्चित करने की सिफारिश कर चुकी है, लेकिन केवल दिशा-निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं होगा।
अस्पतालों में अतिरिक्त पद भरने, अधिक शिफ्ट बनाने, ड्यूटी के बाद अनिवार्य अवकाश और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की व्यवस्था करनी होगी।
थका हुआ डॉक्टर केवल स्वयं संकट में नहीं होता; उसके सामने इलाज करा रहा मरीज भी जोखिम में रहता है। इसलिए डॉक्टरों को विश्राम देना सुविधा नहीं, सुरक्षित चिकित्सा व्यवस्था की बुनियादी शर्त है।
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल
एसोसिएशन और सेंट्रल मार्ड का सर्वेक्षण
३६ घंटे की ड्यूटी ने तोड़ी कमर
८२ प्रतिशत चिकित्सक नींद पूरी नहीं होने से परेशान
नतीजा-मरीजों की सुरक्षित चिकित्सा पर प्रतिकूल असर

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