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मरीज का अंगूठा ही काट दिया!  …लापरवाह डॉक्टरों की गहन जांच कर कार्रवाई की जाए – सुनील प्रभु

सामना संवाददाता / मुंबई
सायन स्थित लोकमान्य तिलक अस्पताल के डॉक्टरों की कथित लापरवाही के कारण एक मरीज का अंगूठा काटे जाने का गंभीर मामला सामने आया है। विधानसभा में शिवसेना पक्ष के मुख्य सचेतक सुनील प्रभु ने औचित्य का मुद्दा उठाते हुए मांग की कि सरकार इस मामले की गहन जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करे और पीड़ित मरीज को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू करे।
विधानसभा में औचित्य के मुद्दे के माध्यम से यह मामला उठाते हुए विधायक सुनील प्रभु ने बताया कि मुंबई के गोरेगांव पूर्व स्थित सोनावाला क्रॉस रोड, २ अमीन इंडस्ट्रीयल एस्टेट, सरदार केरसिंग चाल में रहने वाले विनय तिवारी एक औद्योगिक इकाई में काम करते हैं। काम के दौरान उनका अंगूठा मशीन के नीचे आकर मामूली रूप से दब गया था। इलाज के लिए वे सायन स्थित लोकमान्य तिलक अस्पताल पहुंचे, जहां कथित रूप से वरिष्ठ चिकित्सकों ने उनका उपचार नहीं किया और एक कंपाउंडर को उपचार की जिम्मेदारी सौंप दी। इसके बाद उनका अंगूठा काट दिए जाने की घटना १४ जून २०२६ को हुई।
विनय तिवारी दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र के निवासी हैं। मशीन के नीचे अंगूठा दबने के बाद वे पहले जोगेश्वरी स्थित ट्रॉमा केयर सेंटर गए थे। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया था कि अंगूठे में दरार आई है और स्प्रिंग लगाकर टांके लगाने से वह ठीक हो सकता है। हालांकि, यह उपचार वहां उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें सायन के लोकमान्य तिलक अस्पताल या नायर अस्पताल जाने की सलाह दी गई। इसके बाद विनय तिवारी लोकमान्य तिलक अस्पताल पहुंचे। अंगूठे का उपचार करते समय कंपाउंडर ने वरिष्ठ डॉक्टर से कहा कि उसने इससे पहले कभी अंगूठे की ड्रेसिंग या इस प्रकार का उपचार नहीं किया है, इसलिए वरिष्ठ डॉक्टर स्वयं उपचार करें। वरिष्ठ डॉक्टर ने मामले की अनदेखी कर दी। इसके बाद कंपाउंडर ने विनय तिवारी को बेहोशी की दवा देकर उनके हाथ का ठीक और सुरक्षित अंगूठा काट दिया। इस घटना के कारण तिवारी को असहनीय पीड़ा और भारी मानसिक कष्ट सहना पड़ा। साथ ही उनके शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग स्थायी रूप से कट गया।

निष्पक्ष और गहन जांच की मांग
विधायक सुनील प्रभु ने सदन में मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कर जिम्मेदार डॉक्टरों तथा कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही पीड़ित मरीज को उचित मुआवजा देने की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए।

 

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