मुख्यपृष्ठनए समाचारएथेनॉल का शोर, जनता पर बोझ घनघोर...भाजपा बताए-कहां गया जनहित का दौर?-कांग्रेस

एथेनॉल का शोर, जनता पर बोझ घनघोर…भाजपा बताए-कहां गया जनहित का दौर?-कांग्रेस

अनिल मिश्र / रांची

भाजपा सरकार की एथेनॉल (E20) नीति पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता का लक्ष्य देशहित में हो सकता है, लेकिन किसी भी नीति की सफलता का पैमाना केवल सरकारी दावे नहीं, बल्कि उसका आम नागरिक पर पड़ने वाला प्रभाव होता है। आज करोड़ों वाहन मालिक यह जानना चाहते हैं कि सरकार ने एथेनॉल नीति लागू करने से पहले उनके हितों की रक्षा के लिए क्या तैयारी की थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जैव ईंधन नीति की नींव ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से रखी थी। उस समय नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू करने पर ज़ोर दिया गया ताकि वाहन उद्योग, तेल कंपनियाँ और देश के करोड़ों वाहन उपभोक्ता नई व्यवस्था के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें। लेकिन भाजपा सरकार ने उसी नीति को तेज़ी से आगे बढ़ाते हुए प्रचार तो खूब किया, परंतु संक्रमण व्यवस्था, पुराने वाहनों की अनुकूलता और उपभोक्ताओं की चिंताओं पर अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखाई। इस संबंध में झारखंड प्रदेश, कांग्रेस अध्यक्ष विजय शंकर नायक ने कहा कि देश का मध्यम वर्ग पहले ही भारी जीएसटी, रोड टैक्स, पंजीकरण शुल्क, महंगे बीमा, लगातार बढ़ते टोल टैक्स और ऊँची ईंधन कीमतों का बोझ उठा रहा है। अब यदि उसे अपने वाहन की अनुकूलता, रखरखाव और भविष्य को लेकर भी चिंता करनी पड़े, तो यह सरकार की जवाबदेही का प्रश्न है। विकास का अर्थ यह नहीं कि हर नई नीति की कीमत आम नागरिक की जेब से वसूली जाए। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार लगातार किसानों के नाम पर राजनीति करती है, लेकिन उसे यह भी बताना चाहिए कि जल संकट झेल रहे देश में गन्ने जैसी अधिक जल-आधारित फसलों पर बढ़ती निर्भरता का दीर्घकालिक समाधान क्या है। ऊर्जा सुरक्षा और जल सुरक्षा दोनों राष्ट्रीय प्राथमिकताएँ हैं; किसी एक लक्ष्य के लिए दूसरे संसाधन की अनदेखी नहीं की जा सकती।विजय शंकर नायक ने कहा कि दुनिया के कई देशों ने एथेनॉल मिश्रण को अपनी कृषि, जल संसाधनों और वाहन तकनीक के अनुरूप चरणबद्ध ढंग से लागू किया। भारत में भी यही विवेकपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। सरकार का उद्देश्य केवल लक्ष्य हासिल करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी होना चाहिए कि करोड़ों वाहन उपभोक्ताओं को अनावश्यक आर्थिक और तकनीकी कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
उन्होंने केंद्र सरकार से निम्नलिखित प्रश्नों के स्पष्ट उत्तर माँगे।क्या सरकार पुराने वाहनों पर E20 के दीर्घकालिक प्रभावों का विस्तृत अध्ययन सार्वजनिक करेगी?
•क्या वाहन मालिकों की संभावित अतिरिक्त रखरखाव लागत पर कोई मूल्यांकन किया गया है?
• जल संकट वाले राज्यों में एथेनॉल उत्पादन के विस्तार के लिए सरकार की जल संरक्षण रणनीति क्या है?
• क्या सरकार एथेनॉल नीति पर विस्तृत श्वेत पत्र जारी करेगी, जिसमें उपभोक्ताओं, किसानों और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का समग्र आकलन हो? नायक ने मांग की कि केंद्र सरकार एथेनॉल नीति पर व्यापक सार्वजनिक संवाद शुरू करे, विशेषज्ञों की राय को महत्व दे, वाहन उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए स्पष्ट संक्रमण नीति घोषित करे तथा करों, टोल और ईंधन से जुड़े बढ़ते आर्थिक बोझ की समीक्षा कर मध्यम वर्ग को राहत दे। उन्होंने कहा कि सरकार का दायित्व केवल लक्ष्य हासिल करना नहीं, बल्कि जनता का विश्वास भी हासिल करना है। यदि किसी नीति से जनता के मन में भ्रम, चिंता और आर्थिक असुरक्षा पैदा होती है, तो लोकतांत्रिक सरकार का कर्तव्य है कि वह संवाद, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ आगे बढ़े। यही सुशासन की वास्तविक कसौटी है।

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