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वर्षों बीतने के बाद भी वरासत के लिए तहसील के चक्कर काट रहे किसान

राजेश सरकार / प्रयागराज

उत्तर प्रदेश सरकार जहां वरासत (उत्तराधिकार) की प्रक्रिया को ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने का दावा कर रही है, वहीं यमुनापार के लालापुर क्षेत्र में इसकी हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। क्षेत्र के दर्जनों गांवों में आज भी सैकड़ों किसानों की जमीनें मृतकों के नाम दर्ज हैं। वर्षों बीत जाने के बाद भी वारिसों के नाम खतौनी के मुख्य पृष्ठ पर दर्ज नहीं हो सके हैं, जिससे किसानों को रोजमर्रा के कामों में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि वरासत दर्ज कराने के लिए उन्हें तहसील, लेखपाल और कानूनगो कार्यालयों के लगातार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। कई मामलों में मृतक किसान के स्थान पर वारिसों के नाम वर्षों से लंबित हैं, जबकि जिन मामलों में नाम दर्ज किए गए हैं, उनमें भी कई प्रकार की त्रुटियां सामने आ रही हैं।
किसानों के अनुसार, कई खतौनियों में नामों की स्पेलिंग गलत दर्ज है, जबकि कई जगह पिता का नाम तक बदल गया है। ऐसी त्रुटियों के कारण वास्तविक वारिस अपनी ही जमीन पर कानूनी अधिकार साबित करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं।
इस लापरवाही का सीधा असर किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। खतौनी में सही नाम दर्ज न होने से बैंक किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और कृषि ऋण देने से इंकार कर देते हैं। वहीं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना और सरकारी क्रय केंद्रों पर उपज बेचने जैसी योजनाओं का लाभ लेने में भी किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा वरासत लंबित रहने से गांवों में पारिवारिक और भूमि विवाद भी बढ़ रहे हैं।
पीड़ित किसानों ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन आवेदन करने के बावजूद महीनों तक फाइलों का निस्तारण नहीं किया जाता। उनका कहना है कि लेखपाल और कानूनगो स्तर पर अनावश्यक आपत्तियां लगाकर मामलों को लंबित रखा जाता है। किसानों का आरोप है कि सुविधा शुल्क नहीं मिलने पर फाइलों को निरस्त कर दिया जाता है या लंबे समय तक ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
क्षेत्रीय किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि लंबित वरासत मामलों की विशेष अभियान चलाकर जांच कराई जाए, राजस्व अभिलेखों में व्याप्त त्रुटियों को तत्काल सुधारा जाए और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर किसानों को राहत दिलाई जाए।

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