राजन पारकर / मुंबई
मुंबई की सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसों के नाम पर हजारों करोड़ रुपये के टेंडर को लेकर उठे सवाल आखिरकार विधानसभा में गूंज उठे। विपक्ष की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों के बीच सरकार ने सदन में विस्तृत जवाब देते हुए दावा किया कि तत्कालीन तू अजून आहे बेस्टसमिति अध्यक्ष अनिल पाटणकर के कार्यकाल में 3,654 करोड़ रुपये के कथित विवादित ई-बस टेंडर में नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनी पर कड़ी कार्रवाई की गई है। कंपनी का ठेका रद्द कर उसे तीन वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है तथा केंद्र और राज्य सरकार की ओर से एक भी रुपये की सब्सिडी जारी नहीं की गई।
विधानसभा में नियम 105 के तहत विधायक तुकाराम काते की लक्षवेधी सूचना पर उपमुख्यमंत्री (नगर विकास) ने जवाब देते हुए बताया कि केंद्र सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन नीति और महाराष्ट्र सरकार की ई-व्हीकल नीति के तहत बेस्टने वर्ष 2021 में 200 वातानुकूलित डबल डेकर इलेक्ट्रिक बसें किराये पर लेने के लिए टेंडर जारी किया था।
सरकार ने बताया कि इस टेंडर में चार कंपनियों ने भाग लिया था और कॉसिस ई-मोबिलिटी प्रा. लि. सबसे कम दर (एल-1) पर चयनित हुई। बाद में बेस्टसमिति ने मुंबई में प्रदूषण कम करने और इलेक्ट्रिक बसों की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए 200 बसों का प्रस्ताव बढ़ाकर 900 बसें करने का निर्णय लिया। इसी कारण टेंडर का मूल्य लगभग 812 करोड़ रुपये से बढ़कर 3,654.72 करोड़ रुपये हो गया।
सरकार ने विपक्ष के उस आरोप को भी खारिज किया कि तत्कालीन बेस्टसमिति अध्यक्ष अनिल पाटणकर ने इस निर्णय में भूमिका निभाई थी। सदन में स्पष्ट किया गया कि 25 जनवरी 2022 को जब यह प्रस्ताव बेस्ट समिति के समक्ष रखा गया और मंजूर हुआ, उस समय अनिल पाटणकर समिति के अध्यक्ष नहीं थे।
सरकार के अनुसार, चयनित कंपनी ने अपने दस्तावेजों में पर्याप्त आर्थिक क्षमता और नेटवर्थ दर्शाई थी, इसलिए नियमानुसार उसे पात्र माना गया। लेकिन बाद में कंपनी निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रोटोटाइप बस उपलब्ध कराने में विफल रही। इसे गंभीर अनुबंध उल्लंघन मानते हुए बेस्ट प्रशासन ने कंपनी का खरीद आदेश रद्द कर दिया, 3.50 करोड़ रुपये की सुरक्षा जमा राशि जब्त की और तीन वर्षों के लिए सभी बेस्ट निविदाओं से प्रतिबंधित कर दिया।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि विवादित कंपनी को केंद्र अथवा राज्य सरकार की ओर से कोई अनुदान जारी नहीं किया गया।
दूसरी ओर स्वीच मोबिलिटी ऑटोमोटिव लिमिटेड ने अब तक 50 डबल डेकर इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध कराई हैं। इसके आधार पर केंद्र सरकार की योजना के तहत उसे 27.64 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई है।
हालांकि सरकार के स्पष्टीकरण के बावजूद विपक्ष का कहना है कि मूल टेंडर 200 बसों का था, जिसे बिना नई निविदा निकाले सीधे 900 बसों तक बढ़ा देना अपने आप में गंभीर प्रश्न खड़े करता है। विपक्ष ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई है।
अब सवाल यही है कि जब टेंडर की कीमत चार गुना से अधिक बढ़ी, तो क्या पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी या फिर यह मामला आने वाले दिनों में राजनीतिक और कानूनी विवाद का नया केंद्र बनेगा
