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दिल की धड़कनों का असामान्य होना हार्ट रिद्म संबंधी समस्याओं को समय रहते पहचानें

सामना संवाददाता / मुंबई

दिल की धड़कनों की रिद्म संबंधी समस्याओं को अक्सर किसी गंभीर स्थिति से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसके शुरुआती संकेत कई बार बहुत हल्के भी हो सकते हैं। जैसे—दिल की धड़कन का अनियमित होना, सीने में कुछ क्षणों के लिए फड़फड़ाहट महसूस होना या अचानक कुछ समय के लिए धड़कन का तेज़ हो जाना। ये लक्षण अरिद्मिया (हार्ट रिद्म संबंधी समस्या) की ओर इशारा कर सकते हैं। यह ऐसी स्थिति है, जिसमें दिल बहुत तेज, बहुत धीमी या अनियमित गति से धड़कता है। हालांकि, हर अनियमित धड़कन खतरनाक नहीं होती, लेकिन यदि ऐसे लक्षण पहली बार दिखाई दें, लगातार बने रहें या इनके कारण कोई परेशानी महसूस हो, तो योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से जल्द जांच करानी चाहिए।
एबॉट के भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, हांगकांग, ताइवान और कोरिया में कार्डियक रिद्म मैनेजमेंट व्यवसाय के जनरल मैनेजर अजय सिंह चौहान ने कहा, “दिल की धड़कनों की रिद्म संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए सबसे ज़रूरी है कि उन्हें समय पर सही इलाज मिले, ताकि वे जल्द सामान्य जीवन में लौट सकें। एबॉट में हमारा प्रयास है कि मरीजों के इलाज की पूरी प्रक्रिया को आसान बनाया जाए। इसके लिए हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित निगरानी की मदद से बीमारी की समय रहते पहचान करने और ब्रैडीकार्डिया जैसी समस्याओं के लिए आधुनिक इलाज उपलब्ध कराने पर काम कर रहे हैं।”
लीडलेस पेसमेकर जैसी आधुनिक तकनीकों को इस तरह विकसित किया गया है कि लीड्स से जुड़ी समस्याओं और संक्रमण के खतरे को कम किया जा सके। साथ ही, इससे मरीज को अधिक आराम मिलता है और उसके जल्दी स्वस्थ होने की संभावना भी बढ़ती है। जैसे-जैसे लोगों में जागरूकता बढ़ रही है और समय पर बीमारी की पहचान हो रही है, हमारा प्रयास है कि अधिक से अधिक मरीजों तक ये आधुनिक उपचार पहुंचें। इसके साथ ही, हम डॉक्टरों के साथ मिलकर ऐसा उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो न केवल चिकित्सकीय रूप से प्रभावी हो, बल्कि मरीज की जरूरतों को भी केंद्र में रखे।
डॉ. हरेश मेहता, कार्डियोलॉजी के डायरेक्टर, S.L. राहेजा अस्पताल, मुंबई, ने कहा, “हर साल बड़ी संख्या में लोग दिल की धड़कनों की रिद्म संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए पेसमेकर लगवाते हैं। पारंपरिक पेसमेकर प्रभावी होते हैं, लेकिन लीडलेस पेसमेकर एक ऐसा विकल्प है, जिसे लगाने के लिए शरीर में कम हस्तक्षेप करना पड़ता है। इसमें छाती पर कोई निशान दिखाई नहीं देता और प्रक्रिया से जुड़े जोखिम भी कम होते हैं। सही मरीजों के लिए यह तकनीक जल्दी स्वस्थ होने, अधिक आराम महसूस करने और जल्द सामान्य दिनचर्या में लौटने में मदद कर सकती है।”
आज के समय में अधिक से अधिक लोग ऐसे उपचार की तलाश में हैं, जो उनकी जीवनशैली के अनुरूप हो। ऐसे में इस तरह की आधुनिक तकनीकें भारत जैसे देश में और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती हैं, जहां इलाज के बाद नियमित फॉलो-अप कराना कई बार चुनौतीपूर्ण होता है। ये तकनीकें इलाज की प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ-साथ मरीजों के अनुभव को बेहतर बनाने और उपचार के बेहतर परिणाम हासिल करने में भी मदद कर सकती हैं।
दिल की धड़कनों की रिद्म संबंधी समस्याओं के इलाज में लगातार नई तकनीकें और बेहतर विकल्प उपलब्ध हो रहे हैं। आज डॉक्टरों के पास बीमारी की अधिक सटीक पहचान करने के लिए आधुनिक उपकरण हैं और इलाज के लिए लीडलेस पेसमेकर जैसे ऐसे विकल्प भी हैं, जिन्हें लगाने के लिए शरीर में कम हस्तक्षेप करना पड़ता है और जो सही मरीजों को अधिक आराम और सुविधा दे सकते हैं। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात है समय रहते कदम उठाना। समय पर डॉक्टर से सलाह लेने से बीमारी की जल्द पहचान हो सकती है और आधुनिक उपचार का लाभ मिल सकता है, जिससे जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है और लंबे समय तक हृदय का स्वास्थ्य भी बेहतर बना रहता है। अंततः, जागरूकता और समय पर इलाज ही इन नई तकनीकों का पूरा लाभ उठाने का सबसे प्रभावी तरीका हैं।
भारत में यह विषय और भी अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि हृदय एवं रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियां आज भी सार्वजनिक स्वास्थ्य के सामने एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, हर साल दुनियाभर में लाखों लोग हृदय एवं रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों से प्रभावित होते हैं। अरिद्मिया किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा काफी बढ़ जाता है और बुजुर्गों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। अनुमान है कि 60% तक बुजुर्गों में किसी न किसी प्रकार का अरिद्मिया हो सकता है। हृदय संबंधी बीमारियों के इस बढ़ते बोझ के बीच, दिल की धड़कनों की लय से जुड़ी समस्याओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि कई बार इन्हें तनाव, थकावट या जीवनशैली से जुड़ी सामान्य थकान समझकर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।
अरिद्मिया तब होता है, जब हृदय की विद्युत प्रणाली (इलेक्ट्रिकल सिस्टम) सामान्य रूप से काम नहीं करती। इसके कारण दिल की धड़कन बहुत तेज़ (टैकीकार्डिया), बहुत धीमी (ब्रैडीकार्डिया) या अनियमित हो सकती है, जैसा कि एट्रियल फिब्रिलेशन में देखा जाता है। कुछ प्रकार के अरिद्मिया में दिल की धड़कन तेज़ महसूस होना, सांस फूलना, थकान, चक्कर आना या बेहोशी जैसे स्पष्ट लक्षण दिखाई दे सकते हैं। वहीं, कुछ मामलों में इसके कोई लक्षण नहीं होते और इसकी पहचान केवल चिकित्सकीय जांच के दौरान ही हो पाती है।
हालांकि हर अनियमित धड़कन खतरनाक नहीं होती, लेकिन यदि इसका इलाज न कराया जाए, तो कुछ मामलों में यह स्ट्रोक, हार्ट फेलियर या अचानक होने वाले कार्डियक अरेस्ट जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ा सकती है। इसलिए अपने शरीर के संकेतों को समझना और उन पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। यदि आपको कुछ भी असामान्य महसूस हो खासकर जब ऐसे लक्षण पहली बार दिखाई दें या लगातार बने रहें तो बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लें। समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने से लंबे समय तक हृदय और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य की रक्षा करने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।
अरिद्मिया का इलाज सभी लोगों के लिए एक जैसा नहीं होता। सही उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि दिल की धड़कनों में किस प्रकार की गड़बड़ी है, उसकी गंभीरता कितनी है और मरीज की स्वास्थ्य स्थिति कैसी है। कुछ मामलों में, जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव या दवाएं ही दिल की धड़कन को सामान्य करने के लिए पर्याप्त होती हैं। वहीं, कुछ मरीजों में डॉक्टर हृदय के असामान्य विद्युत संकेतों (इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स) को ठीक करने के लिए विशेष प्रक्रियाओं की सलाह दे सकते हैं। कुछ मामलों में ऐसा उपकरण भी लगाया जा सकता है, जो दिल की धड़कन को नियमित बनाए रखने में मदद करता है।
पेसमेकर लंबे समय से अरिद्मिया के इलाज का एक प्रभावी विकल्प रहे हैं, खासकर उन लोगों के लिए जिनका दिल बहुत धीमी गति से धड़कता है या जिनके हृदय में विद्युत संकेत (इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स) सही तरीके से प्रवाहित नहीं हो पाते। पारंपरिक पेसमेकर आमतौर पर छाती के ऊपरी हिस्से की त्वचा के नीचे लगाए जाते हैं और इन्हें लीड्स कहलाने वाले पतले, इंसुलेटेड तारों के माध्यम से हृदय से जोड़ा जाता है। इस प्रक्रिया के बाद छाती पर निशान या उभार रह सकता है। इसके अलावा, लगभग हर 8 में से 1 मरीज में पेसमेकर लगाए जाने के बाद संक्रमण, लीड का अपनी जगह से खिसक जाना या उसका टूट जाना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
आज हृदय उपचार के क्षेत्र में हो रही प्रगति मरीजों के लिए नई उम्मीदें लेकर आ रही है। कुछ चुनिंदा मरीजों के लिए लीडलेस पेसमेकर ऐसा आधुनिक विकल्प है, जिसे लगाने के लिए छाती पर चीरा नहीं लगाना पड़ता। भारत में उपलब्ध ये छोटे उपकरण पैर की नस के जरिए कैथेटर की मदद से सीधे हृदय के भीतर लगाए जाते हैं। इसमें न तो तारों (लीड्स) की जरूरत होती है और न ही छाती पर चीरा लगाना पड़ता है। इससे इलाज की प्रक्रिया आसान हो जाती है और मरीज को अधिक आराम मिलने के साथ-साथ जल्दी स्वस्थ होने में भी मदद मिलती है।

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