डा. कमल कान्त उपमन्यु / मथुरा
जयगुरुदेव आश्रम में आयोजित तीन दिवसीय गुरु पूर्णिमा सत्संग मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति के चलते आश्रम परिसर में लघु भारत जैसा दृश्य देखने को मिला।
महोत्सव की शुरुआत संस्थाध्यक्ष पंकज महाराज ने नाम योग साधना मंदिर और सत्संग भवन में गुरु पूजा, ध्यान और आरती के साथ की। इस दौरान उन्होंने गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि जैसे समुद्र की लहरों का संबंध समुद्र से होता है वैसे ही गुरु का संबंध शब्द से होता है। गुरु के ध्यान से मन दुनिया से हटकर ईश्वर की ओर जागृत होता है।
उन्होंने प्रवचन में मानव जीवन के महत्व कर्म के सिद्धांत शाकाहार और मन के नियंत्रण पर विस्तार से प्रकाश डाला। महाराज ने कहा कि कर्मों का नियम अटल है और मनुष्य को अपने कर्मों के अनुसार ही फल प्राप्त होता है। मेला स्थल पर श्रद्धालुओं ने गुरु पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। बड़ी संख्या में भक्तों ने सेवादारी करते हुए यातायात व्यवस्था संभाली और जगह-जगह भंडारे लगाकर प्रसाद वितरण किया। रात्रि में दर्जनों जोड़ों का दहेज रहित विवाह भी संपन्न कराया गया। महाराज ने जयगुरुदेव नाम के जाप का महत्व बताते हुए कहा कि इससे भौतिक और आत्मिक कल्याण संभव है। प्रवचन के पश्चात श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
इस अवसर पर पंकज महाराज ने दादा गुरु स्वामी घूरेलाल महाराज का वार्षिक भंडारा 17 से 21 दिसंबर तक जयगुरुदेव आश्रम में आयोजित करने की घोषणा की। इसके साथ ही शाकाहार सदाचार और मद्यनिषेध के प्रचार के लिए जिलास्तर पर साइकिल यात्राएं निकालने का आह्वान किया गया। बताया गया कि पंकज महाराज 20 अगस्त से मिर्जापुर जिले में 108 दिवसीय सत्संग भ्रमण पर प्रस्थान करेंगे।
