मुख्यपृष्ठसमाचारमुड़ियापूनों मेला में दिखाई दिया श्रद्धालुओं का सैलाब

मुड़ियापूनों मेला में दिखाई दिया श्रद्धालुओं का सैलाब

-ढप-ढोलक, मृंदग की धुन पर नाचते हुए निकले मुड़िया संत

डा. कमल कान्त उपमन्यु / मथुरा

अटूट श्रद्धा और भक्ति से जुड़े राजकीय मुड़िया पूर्णिमा मेला का समापन बुधवार को निकली मुड़िया शोभायात्रा के साथ हुआ। श्रद्धा के सैलाब के बीच सात दिन में तलहटी में पहुंचे करीब डेढ़ करोड़ भक्तोंं ने गिरिराज महाराज की परिक्रमा लगाई।
मुड़िया पूर्णिमा मेला के दृष्टिगत जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने गिरिराज जी महाराज मंदिर के आस-पास तथा परिक्रमा मार्ग का निरीक्षण किया व विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व डॉ0 पंकज कुमार वर्मा, अपर जिलाधिकारी प्रशासन अमरेश कुमार, उप जिलाधिकारी गोवर्धन सुशील कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
पूर्णिमासी की पूर्व रात्रि को भीड़ ज्यादा होने के कारण संकरे रास्तों से परिक्रमा को डायवर्ट कर दूसरी जगह से निकालना पड़ा। गिरिराज महाराज की 21 किलोमीटर की परिक्रमा ही नहीं बल्कि आसपास में कई-कई किलोमीटर तक श्रद्धालु दिखाई दिये। भीड़ के दबाब के चलते गिरिराज जी के मुख्य मंदिरों में श्रद्धालु पूजा व दर्शन भी नहीं कर पाए। भीड़ में जाकर सौभाग्यशाली भक्त गिरिराज जी की शिला को स्पर्श कर सका। गोवर्धन धाम में आषाढ़ मास की पूर्णिमा को प्राचीन मुड़िया पूर्णिमा मेला लगता है। इस मेला को उत्तर प्रदेश सरकार ने राजकीय दर्जा दिया है और सभी व्यवस्थाएं शासन स्तर से की जाती हैं। गोवर्धन के इस मेला में जहां प्राचीन परंपरा में मुड़िया शोभायात्रा निकाली जाती है, वहीं भक्त अपने आराध्य गिरिराज महाराज का पूजन, दर्शन व सप्तकोसीय परिक्रमा करने आते हैं। मुड़िया पूर्णिमा मेला देवशयनी एकादशी से पहले ही अर्पण करके तन-मन-धन चलो रे चलें सब गोवर्धन की अभिव्यक्ति के साथ शुरू से शुरू हो जाती है। श्रद्धा व आस्था लेकर देश के कोने कोने से आए भक्तों ने गिरिराज महाराज की परिक्रमा कर मन्नत मांगी। मेला के सात दिन गिरिराज महाराज के जयकारे व राधे-राधे के उद्घोष सुनाई दिये। मानसी गंगा की परिक्रमा कर निकाली गई पारंपरिक मुड़िया शोभायात्रा के साथ मेला का समापन हो गया। लेकिन गिरिराज महाराज की परिक्रमा में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कम नहीं हुई है। प्रशासन की ओर से व्यवस्थाएं 30 जुलाई तक रहेगी।
परिक्रमा में चहुओर सुनाई दी राधे-राधे की गूंज
गिरिराज महाराज की तलहटी में आयोजित मुड़िया पूर्णिमा मेला में सात दिन तक श्रद्धा का सैलाब उमड़ा। हर कदम पर भक्तों के मुख से राधे-राधे का नाम निकला। कहीं मन्नत लिए हाथ में दूध का गिलास तोे कहीं कष्टों को हरने के लिए फव्वारे के नीचे स्नान करते श्रद्धालु दिखाई दिए। वास्तव में तन, मन और धन तीनों ही श्रद्धालुओं ने बड़े मनोयोग से अपने आराध्य गिरिराज प्रभु को अर्पित किया। परिक्रमा मार्ग में अपनी आस्था को लेकर श्रद्धालुओं का आने का सिलसिला जारी है। फिर भी सात दिन में प्रशासनिक आंकड़े के हिसाब से डेढ़ करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने गिरिराज महाराज की परिक्रमा लगाई। एसपी देहात मथुरा सुरेश चंद रावत ने बताया कि 23 से 29 जुलाई की सुबह तक डेढ़ करोड़ से अधिक श्रद्धालु गोवर्धन जी की शरण में पहुंचे हैं। गोवर्धन को पहुंचने वाले मथुरा से गोवर्धन, सौंख से गोवर्धन, बरसाना से गोवर्धन, डीग से गोवर्धन, छटीकरा से गोवर्धन इन सभी मार्गों पर कई-कई किमी तक भीड़ ही भीड़ दिखाई दी।
गर्मी भी न रोक सकी श्रद्धालुओं के आस्था के सैलाब को
न धूप का डर, न उमस का। बे-रोकटोक मुड़िया मेला में आस्था का सैलाब उमड़ता रहा। इस बार मेला की शुरूआत 23 जुलाई से हो गई और समापन 29 जुलाई को मुड़िया शोभायात्रा के साथ हुआ। गिरिराज महाराज की तलहटी में आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने अपनी मनोकामना के लिए न तो धूप की चिंता की और न ही गर्मी के कारण परिक्रमा मार्ग की तपती सड़क की। श्रद्धालुओं का रेला सात दिन तक अनवरत आस्था और विश्वास में श्रद्धा लिए आगे बढ़ता रहा। श्रद्धालु गिरिराज भक्ति में ऐसे भीगे नजर आये कि सब कुछ छोड़ अपनी मनोकामना के लिए परिक्रमा पूरी की। परिक्रमार्थी श्रद्धालु प्रसिद्ध गिरिराज दानघाटी मंदिर, मानसी गंगा मुकुट मुखारविंद मंदिर, जतीपुरा मुखारविंद मंदिर, हरिगोकुल मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर आदि पर श्रद्धालुओं ने दुग्धाभिषेक कर मनौती मांगी। मुड़िया पूर्णिमा मेला में भक्तों ने आन्यौर, पूंछरी, जतीपुरा, राधाकुंड, मानसी गंगा होकर परिक्रमा लगाई। मानसी गंगा पर लगे फुव्वारों में स्नान किया।

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