– हाई कोर्ट के आदेश के बाद सरकार का बड़ा ऐलान
राजन पारकर / मुंबई
मुंबई की सड़कों, फुटपाथों और रेलवे स्टेशनों के बाहर वर्षों से फैले फेरीवालों के मुद्दे पर आखिरकार सरकार ने विधानसभा में बड़ा खुलासा किया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद अब हर पात्र फेरीवाले को क्यू आर कोड आधारित पहचान पत्र दिया जा रहा है और उसके बाद अवैध फेरीवालों के खिलाफ पूरे शहर में विशेष अभियान चलाया जाएगा।
विधानसभा में नियम 105 के तहत विधायक संजय उपाध्याय, अमित साटम और तुकाराम काते द्वारा उठाई गई लक्षवेधी सूचना के जवाब में उपमुख्यमंत्री (नगर विकास) ने कहा कि हाई कोर्ट के 6 मई और 10 जून 2026 के आदेशों के अनुसार सर्वेक्षण में शामिल 99,435 फेरीवालों की पहचान क्यू आर कोड के जरिए सुनिश्चित की जा रही है।
सरकार के अनुसार अब तक 47,720 फेरीवालों का सत्यापन कर उन्हें क्यू आर कोड आधारित पहचान पत्र जारी किया जा चुका है, जबकि 3,167 फेरीवालों की मृत्यु होने की जानकारी सामने आई है। शेष 48,548 फेरीवालों का दस्तावेजों और पहचान के आधार पर कड़ा सत्यापन जारी है।
सरकार ने दावा किया कि केवल आवेदन के आधार पर नहीं, बल्कि आधार कार्ड, मूल रसीद, फोटो, व्यवसाय का स्थान और निवास संबंधी जानकारी की जांच के बाद ही क्यू आर कोडजारी किया जा रहा है। पूरा डेटा महानगरपालिका के सर्वर पर सुरक्षित रखा गया है, जिससे किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े या क्यू आर कोड के दुरुपयोग पर रोक लगाई जा सके।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि एक ही क्यू आर कोड पर कई लोग व्यवसाय करते हुए पाए गए, तो संबंधित पहचान पत्र तत्काल रद्द किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ दंडात्मक तथा आवश्यक होने पर आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी। इसके लिए पुलिस की मदद भी ली जाएगी।
इधर टाऊन वेंडिंग कमिटीके गठन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। आठ निर्वाचित और पांच सरकारी सदस्यों की नियुक्ति हो चुकी है, जबकि शेष सदस्यों की नियुक्ति के बाद समिति को अधिसूचित किया जाएगा।
सरकार ने विधानसभा में यह भी स्वीकार किया कि पात्र और अपात्र फेरीवालों की सूची पहले ही सार्वजनिक की जा चुकी है और महानगरपालिका के विभागीय कार्यालयों के नोटिस बोर्ड पर भी प्रदर्शित की गई है।
सबसे अहम घोषणा यह रही कि क्यू आर कोड वितरण पूरा होने के बाद अवैध फेरीवालों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाएगा। रेलवे स्टेशन से 150 मीटर के दायरे, नो-हॉकिंग ज़ोन, अस्पतालों, स्कूलों, प्रमुख सड़कों और फुटपाथों पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेज की जाएगी।
हालांकि, सरकार ने यह भी कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के निर्देशानुसार पात्र फेरीवालों को आजीविका के लिए अस्थायी पिच (बैठने की जगह) उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। साथ ही क्यू आर कोडधारक वैध फेरीवालों की सूची संबंधित पुलिस थानों को उपलब्ध कराई गई है और ऐसे वैध फेरीवालों के खिलाफ अनावश्यक कार्रवाई नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।
सवाल अब भी कायम है…
सरकार के दावों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या क्यू आर कोड व्यवस्था वास्तव में मुंबई के फुटपाथों को अवैध कब्जों से मुक्त कर पाएगी, या फिर यह भी केवल कागज़ी कार्रवाई बनकर रह जाएगी? शहर की जनता की निगाहें अब अदालत के आदेशों के बाद होने वाली वास्तविक कार्रवाई पर टिकी हैं।
