राजेश सरकार / प्रयागराज
यमुनापार की घनी आबादी वाले इलाके नैनी में रविवार को समाजवादी पार्टी की मासिक बैठक आयोजित की गई। तीन घंटे से अधिक समय तक चली इस उच्च स्तरीय बैठक में सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने स्थानीय समस्याओं से लेकर प्रदेश की राजनीति पर तीखा प्रहार किया। बैठक में मुख्य रूप से यमुनापार के बंद पड़े भारी और लघु उद्योग, आसमान छूती बेरोजगारी और बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गहन मंथन हुआ।
सांप्रदायिकता और ‘चढ़ावा चोरी’ पर सीधा हमला
बैठक में सपा नेताओं ने सत्ताधारी दल पर बेहद गंभीर और तीखे आरोप लगाए। पार्टी ने प्रस्ताव पारित करते हुए कहा कि मंदिर के चढ़ावे की चोरी के पैसों से वोट खरीदने वाली सांप्रदायिक ताकत का सपा जनता के बीच जाकर पुरजोर विरोध करेगी। सपा नेताओं ने जनता से अपील की कि वे इस ‘चढ़ावा चोरी’ के पैसे से मिलने वाली किसी भी सरकारी मदद को स्वीकार न करें। नेताओं ने यहां तक कहा कि वर्तमान में दिया जा रहा मुफ्त राशन भी इसी चोरी के पैसे से आ रहा है, जिसे लेने से जनता को साफ इनकार कर देना चाहिए।
‘चोरी के राशन से बेहतर, ईमानदारी की सूखी रोटी’
महानगर अध्यक्ष एडवोकेट सैयद इफ्तिखार हुसैन और प्रदेश सचिव मोहम्मद शारिक ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “चोरी के पैसों का राशन खाने से कहीं बेहतर है कि जनता ईमानदारी से मेहनत-मजदूरी करे और अपनी कमाई का अनाज खाए।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इसी पैसे के दम पर वोटरों को खरीदने का प्रयास करेगी, जिसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
ज्वलंत मुद्दों पर घेरा, 2027 में सरकार बनाने का दावा
सपा महानगर अध्यक्ष ने हुंकार भरते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी सांप्रदायिकता के खिलाफ पूरी ताकत से चुनाव मैदान में उतरेगी। बेरोजगारी, लगातार हो रहे उत्पीड़न, पेपर लीक कांड और ध्वस्त शिक्षा व्यवस्था जैसे ज्वलंत मुद्दों पर प्रदेश की जनता, शिक्षित बेरोजगार और अन्य तबका त्रस्त है और इस बार वह सपा मुखिया अखिलेश यादव के साथ खड़ी है। नेताओं ने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भारी बहुमत के साथ ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की सरकार बनने जा रही है।
इस बैठक में महानगर सपा अध्यक्ष एडवोकेट सैयद इफ्तिखार हुसैन, प्रदेश सचिव मोहम्मद शारिक, पूर्व अध्यक्ष मुश्ताक काजमी, महबूब उस्मानी, राममिलन यादव सहित यमुनापार और महानगर के सैकड़ों वरिष्ठ पदाधिकारी और बूथ स्तर के कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे बूथ स्तर पर जाकर पार्टी की नीतियों और सरकार की नाकामियों को जन-जन तक पहुंचाएं।
