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अंधेरे में ओवरलोड डंपरों से फ्लाई ऐश डंप… ग्रामीणों की सांसों पर मंडरा रहा खतरा…बारा-शंकरगढ़ में रात होते ही बस्तियों, खेतों और रास्तों पर गिराई जा रही जहरीली राख…शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं

राजेश सरकार / प्रयागराज

जनपद के यमुनानगर स्थित बारा और शंकरगढ़ क्षेत्र के कई गांव इन दिनों फ्लाई ऐश (राख) प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शाम ढलते ही ओवरलोड डंपर अंधेरे का फायदा उठाकर बस्तियों, खेतों और कच्चे रास्तों के किनारे जहरीली राख गिराकर फरार हो जाते हैं। इससे पूरे क्षेत्र का वातावरण प्रदूषित हो रहा है और ग्रामीणों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, प्रतिदिन शाम करीब सात बजे के बाद दर्जनों ओवरलोड डंपर बिना किसी सुरक्षा मानक का पालन किए फ्लाई ऐश खुले में डंप कर देते हैं। राख को मिट्टी से ढकने जैसी अनिवार्य प्रक्रिया भी नहीं अपनाई जाती, जिससे सुबह होते ही पूरा गांव धूल और राख की मोटी परत से ढका दिखाई देता है।
ग्रामीणों का कहना है कि उड़ती राख के कारण बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। लगातार धूल के संपर्क में रहने से खांसी, सांस लेने में तकलीफ, एलर्जी और दमा जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि क्षेत्र में टीबी के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लाई ऐश में सिलिका तथा अन्य भारी धातुएं (हेवी मेटल) मौजूद होती हैं। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से सिलिकोसिस, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। वहीं खेतों में राख जमा होने से भूमि की उर्वरता प्रभावित हो रही है तथा तालाबों और कुओं का पानी भी प्रदूषित होने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पानी पीने से मवेशी भी बीमार पड़ रहे हैं।
शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं
ग्रामीणों का आरोप है कि इस संबंध में कई बार उपजिलाधिकारी (एसडीएम), प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय पुलिस से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक न तो किसी डंपर पर प्रभावी कार्रवाई हुई और न ही संबंधित अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि रात के अंधेरे में रिहायशी क्षेत्रों में जहरीली राख फेंकने वालों पर आखिर कब कार्रवाई होगी।
नियमों की अनदेखी का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार फ्लाई ऐश का निस्तारण केवल निर्धारित स्थानों पर किया जा सकता है तथा इसके परिवहन के दौरान वाहनों को तिरपाल से ढंकना अनिवार्य है। ऐसे में रिहायशी क्षेत्रों और कृषि भूमि के आस-पास खुले में फ्लाई ऐश डंप करना नियमों का उल्लंघन है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि रात में फ्लाई ऐश गिराने वाले डंपरों के खिलाफ तत्काल अभियान चलाकर कार्रवाई की जाए, गांवों में स्वास्थ्य परीक्षण के लिए मेडिकल कैंप लगाए जाएं तथा सीसीटीवी कैमरे और नियमित पुलिस गश्त के माध्यम से रात के समय निगरानी सुनिश्चित की जाए।
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि क्षमता से अधिक लदे ओवरलोड डंपर न केवल प्रदूषण फैला रहे हैं, बल्कि सड़कों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण आंदोलन के लिए विवश होंगे। प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है, इस पर अब क्षेत्रवासियों की निगाहें टिकी हैं।

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