राजेश सरकार / प्रयागराज
भीषण गर्मी की मार झेल रहे आम उपभोक्ताओं पर अब बिजली विभाग के एक फैसले ने अतिरिक्त वित्तीय और मानसिक बोझ डाल दिया है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने अपने बिलिंग सॉफ्टवेयर के माध्यम से प्रदेश के करीब 47 लाख उपभोक्ताओं का स्वीकृत लोड अचानक बढ़ा दिया है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा उपभोक्ताओं का स्वीकृत बिजली लोड बिना किसी पूर्व नोटिस के स्वचालित रूप से बढ़ा दिया गया है, जिससे पूरे प्रदेश के उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश और मानसिक तनाव है। उपभोक्ताओं के मोबाइल पर सीधे मैसेज आ रहे हैं कि उनका लोड बढ़ा दिया गया है, जिससे आम जनता में हड़कंप और नाराजगी का माहौल है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अधिकतम उपयोग का हवाला देकर उपभोक्ताओं को सीधे लोड बढ़ाए जाने (जैसे 1 किलो वाट से सीधे 2 या 3 किलो वाट) के मैसेज भेजे जा रहे हैं। आम जनता का कहना है कि भीषण गर्मी में थोड़ी देर कूलर, पंखा या पानी की मोटर चलाने को ही आधार बनाकर विभाग छोटे-छोटे घरों का लोड बढ़ाकर उनके बिजली बिल का फिक्स्ड चार्ज (स्थाई शुल्क) बढ़ा रहा है, जिससे उनकी नींद हराम हो चुकी है।
आम उपभोक्ता की पीड़ा: ‘गर्मी में कूलर-टुल्लू चलाना क्या गुनाह है?’
मध्यम और निम्न वर्ग के उपभोक्ताओं का कहना है कि वे बेहद सीमित संसाधनों में जीवन यापन करते हैं। तेज गर्मी के दिनों में घर के सभी सदस्य एक कमरे में बैठकर पंखा या कूलर चलाते हैं। पानी की टंकी भरने के लिए दिन में या एक दिन छोड़कर महज आधे घंटे के लिए टुल्लू (पानी की मोटर) चलाई जाती है। इन आवश्यक उपकरणों के एक साथ चलने से कुछ समय के लिए लोड बढ़ जाता है, लेकिन इसे ‘स्थाई खपत’ मान लेना पूरी तरह गलत है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिना जमीनी हकीकत जाने और बिना किसी पूर्व सूचना या जांच के सीधे 3 किलोवाट तक लोड बढ़ाना आम जनता को प्रताड़ित करने जैसा है।
विवाद का मुख्य कारण: नियमों के उल्लंघन का आरोप
इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद और कई उपभोक्ता संगठनों ने इस कदम को नियमों के खिलाफ बताया है।
विद्युत आपूर्ति संहिता के नियमों के अनुसार, यदि किसी उपभोक्ता का लोड लगातार तीन महीनों तक स्वीकृत सीमा से अधिक पाया जाता है, तो उसे लोड बढ़ाने से पहले एक महीने का नोटिस देना अनिवार्य है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि इस नियम को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया।
-सब्सिडी छिनने का डर: लोड बढ़ने से न केवल हर महीने आने वाला फिक्स्ड चार्ज (स्थाई शुल्क) बढ़ जाएगा, बल्कि कई गरीब और रियायती श्रेणी के उपभोक्ता सरकारी सब्सिडी के दायरे से भी बाहर हो सकते हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर सवाल:
उपभोक्ता परिषद का यह भी कहना है कि विभाग बिना तकनीकी निरीक्षण और सुरक्षा क्लीयरेंस के कागजों पर लोड बढ़ा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर ट्रांसफार्मर और सबस्टेशनों की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
बिजली विभाग का पक्ष: ‘जुर्माने से बचाने और व्यवस्था सुधारने की कोशिश’
दूसरी ओर, यूपीपीसीएल के अधिकारियों ने इस कार्रवाई का बचाव किया है। विभाग के अनुसार यह कदम विद्युत नियामक आयोग के निर्देशों और सप्लाई कोड के तहत उठाया गया है। जिन उपभोक्ताओं ने पिछले वित्तीय वर्ष में अपने स्वीकृत लोड से अधिक बिजली का इस्तेमाल किया था, सॉफ्टवेयर ने स्वचालित रूप से उनके लोड को वास्तविक खपत के अनुरूप रीवाइज किया है। विभाग की दलील है कि लोड नियमित होने से उपभोक्ताओं पर बार-बार लगने वाली ‘डिमांड पेनाल्टी’ (अतिरिक्त लोड का जुर्माना) बंद हो जाएगी, जिससे लंबी अवधि में उन्हें अनावश्यक शुल्क नहीं देना होगा। इसके साथ ही, वास्तविक लोड का सही पता चलने से बिजली चोरी रोकने और ट्रांसफार्मर ओवरलोडिंग की समस्या को ठीक करने में मदद मिलेगी। भले ही बिजली विभाग इसे व्यवस्था में सुधार और पेनाल्टी से राहत का जरिया बता रहा हो, लेकिन बिना किसी पूर्व चेतावनी या नोटिस के अचानक लिए गए इस फैसले ने आम जनता को मानसिक रूप से परेशान कर दिया है। उपभोक्ता संगठनों ने विद्युत नियामक आयोग से इस ‘एकतरफा’ फैसले पर रोक लगाने और जांच करने की मांग तेज कर दी है।
