अनिल मिश्र / पटना
बिहार सरकार ने राज्य की त्रि-स्तरीय पंचायतों के परिसीमन का बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने पिछले दिनों मंगलवार को इसे मंजूरी दे दी। इस कदम से ग्रामीण इलाकों में जनप्रतिनिधियों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय शासन व्यवस्था में बदलाव आएगा। दरअसल यह परिसीमन 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा। इससे पहले आखिरी बार 1994 में परिसीमन हुआ था, जो 1991 की जनगणना पर आधारित था। इस नए फैसले के बाद अब पंचायतों की संख्या 8053 से बढ़कर 12,000 से ज्यादा होने का अनुमान है। इसका सीधा असर मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्यों के पदों पर पड़ेगा, जिनमें लगभग डेढ़ गुना तक की वृद्धि हो सकती है।इन सभी पदों की संख्या बढ़ने के साथ ही सरकार पर वित्तीय बोझ भी बढ़ेगा। जनवरी 2024 में कैबिनेट ने मुखिया, उप-मुखिया, सरपंच और उप-सरपंच के मानदेय को दोगुना करने का फैसला किया था, जिससे सालाना 339 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है। नए परिसीमन के बाद पदों की संख्या बढ़ने से यह खर्च और बढ़ सकता है।इस प्रक्रिया का असर चुनाव की तारीखों पर भी पड़ेगा। परिसीमन के बाद ही पंचायत चुनाव कराए जाएंगे, इसलिए अक्टूबर-नवंबर 2026 में होने वाले चुनाव अब जुलाई-अगस्त 2027 तक टल सकते हैं, हालांकि कुछ संभावनाओं के मुताबिक चुनाव नवंबर-दिसंबर 2026 में भी हो सकते हैं।इसके अलावा, कैबिनेट ने ‘ग्राम पंचायत कर, दर एवं शुल्क नियमावली 2026’ को भी मंजूरी दी है। इसके तहत अब ग्रामीण क्षेत्रों में होल्डिंग टैक्स और व्यावसायिक शुल्क तय किए जाएंगे, ताकि पंचायतें अपना फंड खुद जुटा सकें और विकास कार्य कर सकें।इस संबंध में अतिरिक्त मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि इस निर्णय से जनसंख्या के हिसाब से सही प्रतिनिधित्व मिलेगा और विकास योजनाओं को लागू करना आसान होगा।
