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टीएमयू में एनईपी-2020 बेस्ड यूजीसी मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण को आठ दिनी एफडीपी

-तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में यूजीसी एमएमटीटीपी सघन ऑनलाइन प्रशिक्षण में देशभर के 280 शिक्षकों की रही भागीदारी

सामना संवाददाता / मुरादाबाद

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के विभिन्न आयामों पर आठ दिनी ऑनलाइन मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण में वीसी प्रो. वीके जैन ने कहा, आज के दौर में अनुभवात्मक अधिगम, प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण, इंटर्नशिप, भारतीय ज्ञान प्रणाली-आईकेएस और संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों- एसडीजी को उच्च शिक्षा से जोड़ना समय की मांग है। उन्होंने कहा, मूल्यपरक, कौशल आधारित एवम् नवाचारोन्मुख शिक्षा ही विकसित भारत के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगी। इस गहन प्रशिक्षण में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों ने समसामयिक विषयों पर व्याख्यान दिए। प्रशिक्षण कार्यक्रम में यूजीसी मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का विशेष सहयोग रहा। प्रशिक्षण सत्रों में देशभर के लगभग 280 शिक्षकों और शिक्षाविदों ने ऑनलाइन माध्यम से प्रतिभाग किया। एएमयू की डॉ. फैज़ा अब्बासी प्रशिक्षण की बतौर प्रोग्राम डायरेक्टर, जबकि टीएमयू की असिस्टेंट डायरेक्टर- अकादमिक डॉ. नेहा आनंद और डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ. वरुण कुमार सिंह की बतौर समन्वयक सक्रिय भूमिका रही।
डीन अकादमिक प्रो. मंजुला जैन ने शिक्षा नीति के क्रियान्वयन की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा, संस्थागत तैयारी और शैक्षणिक नवाचार से ही इसके बेहतर परिणाम मिलेंगे। उन्होंने कहा, उद्योग और अकादमिक जगत के बीच मजबूत तालमेल और रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रमों का होना बेहद जरूरी है। कुमाऊँ यूनिवर्सिटी की यूजीसी एमटीटीसीसी की प्रोग्राम डायरेक्टर प्रो. दिव्या जोशी ने कहा, आत्मनिर्भर भारत के लिए कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा समय की मांग है। एसजीबी अमरावती यूनिवर्सिटी के यूजीसी एमटीटीसीसी की प्रोग्राम डायरेक्टर प्रो. एम. अतीक ने लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम और डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग पर बल दिया। डॉ. हरिसिंह गौर यूनिवर्सिटी के प्रो. आरटी बेदरे ने विविधता और समावेशी शिक्षा के लिए समान अवसर वाले वातावरण की पुरजोर वकालत की। एएमयू के पूर्व निदेशक प्रो. एआर किदवई ने कहा, नैतिक मूल्यों और प्रभावी अकादमिक नेतृत्व संस्थागत उत्कृष्टता की मजबूत आधारशिला हैं। एएमयू की प्रो. सारिका वर्ष्णेय ने भारतीय सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को शिक्षा में शामिल करने पर जोर दिया।
केन्द्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय की पूर्व ओएसडी डॉ. शकीला टी. शम्सू ने नीति के तहत संस्थागत स्वायत्तता और अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट के लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला। एएमयू के प्रो. एसएम खान ने प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों के इस्तेमाल, जबकि एएमयू की प्रो. शीबा हमीद ने कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा को आत्मनिर्भर भारत के लिए महत्वपूर्ण बताया। एएमयू के डॉ. अहमद मुजतबा सिद्दीकी ने पर्यावरण संरक्षण को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रो. अनीसुर रहमान ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र विकास का आधार बताया। एएमयू के प्रो. साजिद जमाल ने परिणाम आधारित विद्यार्थी-केंद्रित पाठ्यक्रम की आवश्यकता पर बल दिया। समापन सत्र में विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला, भारतीय ज्ञान परंपरा, डिजिटल तकनीक, कौशल विकास और उद्योग सहभागिता के आपसी समन्वय से ही एनईपी-2020 के उद्देश्यों को धरातल पर उतारा जा सकता है।

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