अरुण कुमार गुप्ता
मशहूर पर्यावरण व शिक्षाविद और वैज्ञानिक सोनम वांगचुक को जंतर मंतर से हटाने से पहले दिल्ली का पुलिस कमिश्नर बदला गया। जबकि उसका एक साल का टेन्योर बाकी था। अब सोनम वांगचुक को वैâसे जंतर मंतर से उठाया गया, उसकी क्रोनोलॉजी समझिए। सोनम वांगचुक पिछले १६-१७ दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे थे, लेकिन गोदी मीडिया खामोश था। देश के लोगों तक भूख हड़ताल की बात पूरी तरह नहीं पहुंच रही थी। इससे गोदी मीडिया को कोई फर्क नहीं पड़ता है। ऐसे ही गंगा की सफाई के लिए भूख हड़ताल करने वाले जीडी अग्रवाल को सरकार ने मरने के लिए छोड़ दिया था, लेकिन जब सोनम वांगचुक के आंदोलन स्थल पर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने १६ जुलाई को पहुंचकर समर्थन दिया और कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाया जाए। यह बात जेन जी में आग की तरह पैâल गई। जब बात लोगों में पैâलती है तो सरकार की चूलें हिल जाती हैं। १६ जुलाई को ही दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि सोनम के स्वास्थ्य की २४ घंटे मॉनिटरिंग की जाए और उनकी जान की रक्षा की जाए। उसके अगले दिन ही दिल्ली के पुलिस कमिश्नर सतीश गोंचा को हटाकर अनुराग कुमार को नया कमिश्नर बना दिया गया। यह बात पक्की है कि सतीश गोंचा ने सोनम वांगचुक को हटाए जाने का विरोध किया होगा इसलिए उन्हें हटा दिया गया। अनुराग कुमार ने पदभार संभालते ही शाम ७:०० बजे मीटिंग की और डिसाइड किया कि सोनम वांगचुक को सुबह उठा लिया जाएगा। सभी लोगों ने देखा कि सोनम वांगचुक को पर्दा लगाकर उठाया गया। पर्दे में मारा गया, पीट गया किसी ने कुछ नहीं देखा। हाई कोर्ट ने सोनम के स्वास्थ्य का मॉनिटर करने का आदेश दिया था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने आर्डर को साइड कर सोनम को हटाकर हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया। अब हाई कोर्ट अपने ही ऑर्डर का मिस यूज होते हुए चुपचाप देख रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने खुद कहा है कि जो भी व्यक्ति भूख हड़ताल या प्रदर्शन में बैठा है उसकी जान की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। कुछ भी हो मोदी सरकार सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल से डर गई थी और तानाशाही पर उतर गई इसलिए जनता को अब इस तानाशाही को खत्म करने के लिए आगे आना होगा।
अब रेखा गुप्ता की डिग्री पर सवाल!
अब तक तो देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अब दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की डिग्री पर सवाल उठने लगे हैं। रेखा गुप्ता कुछ समय पहले कूड़े के पहाड़ को बोल रही थीं कि भाई तुझे जाना पड़ेगा। वे ऐसे ही नहीं बोल रही थीं। उनमें जरूर कुछ दैवीय शक्तियां हैं। दैवीय शक्तियों की वजह से वह कूडे के पहाड़ को ऑर्डर दे सकती हैं और उन्हीं शक्तियों से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठी हैं। रेखा गुप्ता के एक और चमत्कार की जानकारी आपसे साझा कर रहा हूं। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर रेखा गुप्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए एफिडेविट के अनुसार, २०१९ से लेकर २०२२ के बीच आईएमआईआरसी कॉलेज ऑफ लॉ हापुड़ से उन्होंने ला की डिग्री ली है। कॉलेज की वेबसाइट पर क्लियर लिखा गया है कि किसी भी स्टूडेंट को सेमेस्टर एग्जाम में तभी बैठने दिया जाएगा जब उसकी ७५ प्रतिशत अटेंडेंस होगी। रेखा गुप्ता का घर दिल्ली के शालीमार बाग में है और उनके घर से कॉलेज की दूरी लगभग १२५ किलोमीटर है, लेकिन रेखा गुप्ता के साथ कमाल की बात यह है कि बीजेपी ने २०१९ में राष्ट्रीय महिला मोर्चा कार्यकारिणी का सदस्य बनाया था, २०२० में शालीमार बाग से विधानसभा से चुनाव भी उन्होंने लड़ा था और बुरी तरह हार गई थीं। २०२० से २०२४ तक बीजेपी की सचिव रहीं और महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष भी थीं। २०२२ में पार्षद भी बनीं। अब सवाल यह उठता है की रेखा गुप्ता इतने पदों पर रहीं, राजनीति में एक्टिव रहीं तो मैडम ने करीब २५० किलोमीटर अप डाउन करके लॉ की डिग्री वैâसे हासिल कर ली। क्या यह आम आदमी के लिए संभव है, इसलिए मैंने शुरू में ही बता दिया था कि रेखा गुप्ता में जरूर दैवीय शक्ति है और इसी शक्ति से सीएम बनी हैं। अब सवाल यह भी है कि इनकी लॉ की डिग्री असली भी है या नहीं? क्योंकि इंसान के लिए इतने कम समय में इतना काम करना संभव ही नहीं है। क्या उनकी डिग्री की जांच नहीं होनी चाहिए? क्या उन्होंने शिक्षा के सभी नियमों को फॉलो किया है? रेखा गुप्ता एक संवैधानिक पोस्ट पर बैठी हैं इसलिए डिग्री की जांच होनी ही चाहिए। नहीं तो मैडम कूड़े के पहाड़ की तरह डिग्री को भी बोल देंगी कि डिग्री तुझे असली बनना ही पड़ेगा।
