मुख्यपृष्ठस्तंभफडणवीस सरकार में ६ 'घोस्ट हॉस्टल्स'!..सीएजी की रिपोर्ट ने खोली पोल

फडणवीस सरकार में ६ ‘घोस्ट हॉस्टल्स’!..सीएजी की रिपोर्ट ने खोली पोल

उमन गुप्ता

भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार के अंतर्गत ६ ऐसे ‘घोस्ट हॉस्टल्स’ (फर्जी हॉस्टल) मिले हैं जिनमें एक भी छात्र नहीं था। मतलब सबकुछ कागजी था। बिना किसी छात्र के इन गैर-कार्यात्मक हॉस्टलों को २०२० से २०२४ के बीच १.६२ करोड़ रु का सरकारी फंड जारी किया गया। महाराष्ट्र में ही वैâग की एक ऑडिट रिपोर्ट में महाराष्ट्र सरकार की फ्लैगशिप ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ में ३५०० करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च और बजट नियमों का उल्लंघन पाया गया है।
ऐसे ही मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार के अंतर्गत १२५ प्राइवेट बी.एड कॉलेज जमीन पर गायब पाए गए हैं। जिन पतों पर ये कॉलेज रजिस्टर्ड थे, वहां या तो खाली मैदानों में भैंसें चर रही थीं, इमारतें लॉक थीं या फिर वहां सिलाई-कढ़ाई के केंद्र चल रहे थे। इन तमाम भ्रष्टाचारों को लेकर नरेंद्र मोदी कभी एक शब्द भी नहीं बोलते। मोदी एक राष्ट्रीय आपदा बन चुके हैं। जिन्हें न अपने देश के आम नागरिकों की चिंता है और न ही देश की लोकतांत्रिक विरासत की। उन्हें न जंगलों के लुटने, कटने और बर्बाद होने की चिंता है और न ही इस बात की चिंता है कि भारत पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक २०२६ में १७७ देशों में से १७६वें स्थान पर पहुंच चुका है। चाहे जग्गी वासुदेव हों या गौतम अडानी सभी को भारत के पर्यावरण के साथ खेलने और उसे बर्बाद करने का लाइसेंस नरेंद्र मोदी ने निर्लज्जता से दे दिया है।

आम लोगों को ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियानों से व्यस्त रखा जाता है और दूसरी तरफ देश के लाखों साल पुराने जंगलों को काटने की अनुमति प्रदान कर दी गयी है। यह सब खुलकर इसलिए चल रहा है क्योंकि लोग जो सच में नरेंद्र मोदी से नाराज हैं, उन्हें और उनकी नाराजगी को निपटाने का काम चुनाव आयोग को दे दिया गया है, जो उन्हें अपनी नाराजगी को लोकतांत्रिक तरीके से जाहिर करने के अधिकार से वंचित कर रहा है।

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