मुख्यपृष्ठनए समाचारयूपी में पहली बार ब्लाक प्रमुख बने प्रशासक!

यूपी में पहली बार ब्लाक प्रमुख बने प्रशासक!

 मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ

विधानसभा चुनाव 2027 को जीतने की गरज से बीजीपी नया-नया प्रयोग करने से भी बाज नहीं आ रही है। भाजपा नेतृत्व की यूपी सरकार ने प्रधानों और जिला पंचायत अध्यक्षों के बाद पहली बार 826 ब्लॉक प्रमुखों को प्रशासक बना दिया है। रविवार दोपहर 2 बजे योगी सरकार ने इनकी नियुक्ति को लेकर आदेश जारी कर दिया। यूपी के इतिहास में ऐसा पहली बार है, जब सरकार ने जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुखों और ग्राम प्रधानों को एक साथ प्रशासक बनाया है।पंचायती राज विभाग के अनुसार, ब्लॉक प्रमुखों की पहली बैठक 20 जुलाई 2021 को हुई थी। 19 जुलाई 2026 को 5 साल का कार्यकाल खत्म हो रहा है। ऐसे में सरकार ने उन्हें प्रशासक बनाने का फैसला लिया है। इस दौरान ब्लॉक प्रमुख सिर्फ सामान्य रूटीन काम ही निपटाएंगे। किसी भी तरह का नीतिगत निर्णय अपने स्तर पर नहीं ले पाएंगे। वे किसी भी नीतिगत मामले से संबंधित प्रस्ताव डीएम के माध्यम से शासन को भेजेंगे। शासन स्तर पर ही अंतिम मुहर लगाई जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार ब्लॉक प्रमुखों के अधिकारों को लेकर डिलेट में गाइडलाइन जारी करेगी। जिससे उन्हें यह साफ हो सके कि कौन-कौन से काम कर सकते हैं और किन कार्यों के लिए उन्हें डीएम से परमिशन लेनी पड़ेगी। 26 जून को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी में पंचायत चुनाव टालने पर कड़ी नाराजगी जताई थी। ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की बेंच ने सुनवाई की। उन्होंने सरकार से पूछा- आपने प्रधानों को प्रशासक कैसे बनाया? यह डिविजन बेंच के आदेश का उल्लंघन है, जो अदालत की अवमानना की कैटेगरी में आता है। हाई कोर्ट ने कहा कि प्रधानों को प्रशासक रूप में बने रहने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। 25 और 26 मई 2026 के जिन आदेशों के आधार पर ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने का प्रयास किया गया, उन्हें पहले ही असंवैधानिक घोषित किया जा चुका है।
अदालत ने पंचायत चुनाव टालने को असंवैधानिक बताया है। कोर्ट ने सरकार से हलफनामे के साथ OBC रिपोर्ट और पंचायत चुनाव कराने की टाइमलाइन मांगी है। हालांकि कोर्ट ने अभी किसी तरह की कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई। सहारनपुर के अरविंद राठौर ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि अगली सुनवाई तक सरकार संतोषजनक जवाब नहीं देती तो संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।

अन्य समाचार