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शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में चल रहे अनशन और आंदोलन के समर्थन में बनारस में हुआ उपवास

उमेश गुप्ता / वाराणसी

वैज्ञानिक सोनम वांगचुक के आंदोलन के समर्थन में वाराणसी में साझा संस्कृति मंच द्वारा रविवार को शास्त्री घाट, वरुणापुल पर सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक एक दिवसीय उपवास और प्रधानमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन पत्र देने का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि यह कार्यक्रम किसी के समर्थन मात्र का कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था को बचाने और छात्रों के भविष्य की रक्षा का संकल्प है।
देश की शिक्षा व्यवस्था आज गहरे संकट से गुजर रही है। लगातार हो रहे पेपर लीक, भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं में अनियमितताएं, सरकारी स्कूलों की उपेक्षा, शिक्षा के बढ़ते निजीकरण और महंगी होती पढ़ाई ने करोड़ों छात्रों और अभिभावकों के भविष्य को असुरक्षित बना दिया है। शिक्षा अब अधिकार के बजाय बाजार का सामान बनाई जा रही है, जिसका सबसे अधिक नुकसान गरीब, ग्रामीण और मेहनतकश परिवारों के बच्चों को उठाना पड़ रहा है।
इन्हीं सवालों को लेकर प्रख्यात वैज्ञानिक सोनम वांगचुक, छात्रनेता नेहा बोरा, मनीष, आमीन तथा अन्य साथी दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे। सोनम वांगचुक ने 21 दिनों तक अनशन किया, जिसके बाद बिगड़ते स्वास्थ्य के बीच उन्हें पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाया गया। वहीं नेहा, मनीष, आमीन तथा अन्य साथी अभी भी आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं और शिक्षा के सवाल पर संघर्ष जारी है।
साझा संस्कृति मंच लोकतांत्रिक आंदोलनकारियों को जबरन हटाने की कार्रवाई की निंदा करता है। किसी भी लोकतंत्र में जनता की आवाज को दमन से नहीं दबाया जा सकता। सरकार को आंदोलनकारियों से संवाद करना चाहिए और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
यह आंदोलन अब केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। कांग्रेस, एनएसयूआई (NSUI), इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) सहित अनेक छात्र-युवा संगठन, नागरिक संगठन, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता, विभिन्न राजनीतिक दल तथा देशभर के लोकतांत्रिक समूह शिक्षा के सवाल पर जनमत तैयार कर रहे हैं। अलग-अलग राज्यों में विरोध प्रदर्शन, धरना, अनशन, हस्ताक्षर अभियान और जनसभाओं के माध्यम से शिक्षा बचाने की आवाज लगातार मजबूत हो रही है।
हमारा मानना है कि शिक्षा किसी भी लोकतांत्रिक समाज की बुनियाद होती है। यदि शिक्षा व्यवस्था भ्रष्टाचार, पेपर लीक, निजीकरण और मुनाफाखोरी के हवाले कर दी जाएगी तो देश का भविष्य भी खतरे में पड़ जाएगा। आज लाखों छात्र वर्षों की मेहनत के बावजूद निष्पक्ष परीक्षा और समान अवसर से वंचित हो रहे हैं। यह केवल छात्रों का संकट नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र का संकट है।
उपवास कार्यक्रम में मुख्य रूप से नंदलाल मास्टर, रामजनम यादव, फादर आनंद, नीति भाई, डॉ. धनंजय त्रिपाठी, जागृति राही, ऐड अबू हाशिम, ऐड अब्दुल्लाह, ज्योति गुप्ता, डॉ. अनूप श्रमिक, एकता शेखर , अनुराग , फादर दयाकर, सोनी, अरुण माहेश्वरी, अनिता, महेंद्र, अब्दुल्लाह खान, कन्हैया, रूमान, आशा इत्यादि शामिल रहे।

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