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बिहार में फिर सिपाही भर्ती मामले में सॉल्वर गैंग से जुड़े दो संदिग्ध गिरफ्तार

अनिल मिश्र / पटना

बिहार प्रदेश में सीमांचल से मशहूर कटिहार जिले में हाल ही में हुई बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। इस बीच कटिहार पुलिस ने एक ऐसे संदिग्ध गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिस पर बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा और मद्य निषेध विभाग की भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर चयन कराने का झांसा देने का आरोप है। इस मामले में पुलिस ने कुर्सेला थाना क्षेत्र के महेशपुर से दो युवकों को गिरफ्तार किया है, जबकि पूरे नेटवर्क की जांच अब तेज कर दी गई है। इस संबंध में कटिहार पुलिस अधीक्षक परिचय कुमार ने बताया कि दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी बेहद नाटकीय परिस्थितियों में हुई। इस संबंध में बताया कि वाहन जांच के दौरान बाइक सवार दोनों युवक पुलिस को देखकर भागने लगे, लेकिन पुलिस टीम ने पीछा कर उन्हें दबोच लिया। उसके बाद पूछताछ में उनकी पहचान पूर्णिया जिले के सोनू कुमार और साहिल कुमार के रूप में हुई। तलाशी के दौरान पुलिस के हाथ ऐसे दस्तावेज लगे, जिसने जांच की दिशा ही बदल दी। इस बीच कटिहार पुलिस अधीक्षक परिचय कुमार ने बताया कि इन दोनों आरोपियों के कब्जे से एक सौ से ज्यादा मैट्रिक के मूल प्रमाणपत्र सहित कई अभ्यर्थियों के अन्य मूल दस्तावेज, विभिन्न बैंकों के हस्ताक्षरित ब्लैंक चेक, पांच सौ रुपये के स्टांप पेपर, छह जिंदा कारतूस, दो मोबाइल फोन तथा सिपाही भर्ती परीक्षा के कई अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड बरामद किए गए हैं। वहीं पूछताछ में यह भी सामने आया कि दोनों आरोपी पटना निवासी सुजीत तथा पूर्णिया निवासी मिथुन कुमार और संजय कुमार के साथ मिलकर भर्ती परीक्षाओं में सेटिंग कराने का नेटवर्क चला रहे थे।इस बीच पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच के अनुसार गिरोह अभ्यर्थियों से पुलिस भर्ती में चयन सुनिश्चित कराने के नाम पर प्रति उम्मीदवार दस लाख रुपये तक की लेन- देन करता था। इस संबंध में कटिहार पुलिस अधीक्षक परिचय कुमार ने बताया कि जांच के दौरान पूर्णिया के दो अन्य लोगों के नाम भी सामने आया है। इनमें से एक के पुलिस विभाग में कार्यरत होने की भी चर्चा है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं हर पहलू की निष्पक्ष एवं गहन जांच की जा रही है। वहीं कटिहार पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि बिहार की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में इस नेटवर्क की वास्तविक भूमिका क्या रही है, इस खुलासे के बाद भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई नए सवाल खड़े हो गए हैं। अभी जांच चल रही है, ऐसे में देखना होगा कि बिहार पुलिस कब तक इस पूरे नेटवर्क तक पहुंच पाती है। वहीं कटिहार एसपी ने बताया कि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आरोपियों ने वास्तव में किसी अभ्यर्थी की भर्ती में अवैध तरीके से सेटिंग कराई थी या नहीं। अब तक बरामद दस्तावेजों और शुरुआती पूछताछ के आधार पर दोनों को सॉल्वर गैंग के संदिग्ध सदस्य मानते हुए पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हैं, और कितने अभ्यर्थियों से पैसे वसूले गए।

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