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संपादकीय : क्रांति!.. मोदी-शाह चले जाओ!

पूरे देश में मोदी के खिलाफ जन-आक्रोश फूट पड़ा है। एक बेपरवाह, बेमुरव्वत तानाशाह और उनकी झुंड टोली के खिलाफ हर राज्य की युवा शक्ति सड़कों पर उतर आई है। `तानाशाही नहीं चलेगी’, `मोदी सत्ता छोड़ो’ जैसी गूंज देश की हर गली-सड़क पर सुनाई दे रही है। जनता ने जब डर और अंधभक्ति का बोझ फेंकने और निडरता का कवच पहनकर सड़कों पर उतरने का पैâसला कर ही लिया है, तो मोदी सरकार की जेलें भी कम पड़ जाएंगी और बंदूक की गोलियां भी। माहौल पूरी तरह से गुस्से से भरा दिखने लगा है। सोमवार को संसद भवन पर निकला विशाल मार्च ५६ इंच की छाती वालों के पैर कंपाने वाला है। इस मार्च पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, भयंकर लाठीचार्ज किया, बंदूकें तान दीं, फिर भी युवा पीछे नहीं हटे। इस आंदोलन ने मोदी-शाह के अहंकार को धूल में मिला दिया है। इस भड़के हुए जन-आक्रोश के जनक सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत हैं। बेरोजगार युवाओं की तुलना `तिलचट्टों’ (कॉकरोच) से करके चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने युवाओं के असंतोष को भड़का दिया। युवा वर्ग मोदी राज में `यही हमारा भाग्य है और मोदी ही हमारे भगवान हैं’ के भाव में जी रहा था। लेकिन असलियत में उनका जीना, न नौकरी, न हाथ को काम, न घर और न सम्मान, तिलचट्टों जैसा ही हो गया था। वैसे, तिलचट्टे बेहद कठिन परिस्थितियों में भी टिके रहते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि जब दुनिया का अंत होगा, तब भी जो दो-चार जीव `जिंदा’ बचेंगे, उनमें `तिलचट्टा’ नाम का यह महान जीव शामिल होगा। अब ऐसे ही तिलचट्टों का खौफ प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार को सताने लगा है। सोनम वांगचुक ने इन `तिलचट्टों’ की अगुवाई कबूल की और वे `जंतर-मंतर’ पर निर्णायक लड़ाई के लिए भूख हड़ताल पर बैठ गए। अयोध्या के राम मंदिर में मोदी ने जो सात-आठ दिनों का `उपवास’ और `व्रत’ किया था, यह वैसा (डकार लेते हुए किया गया) नाटक नहीं था। भारतीय जनता पार्टी के किसी भी नेता के नाम देश की आजादी या
राष्ट्र सेवा के लिए उपवास
करने का कोई रिकॉर्ड नहीं है। इसलिए उपवास की ताकत और उसका तेज क्या होता है, यह उन्हें कभी समझ ही नहीं आएगा। उनका अहंकार था कि वांगचुक की भूख हड़ताल को पांच मिनट में कुचल देंगे, लेकिन जब वांगचुक का अनशन २० दिनों तक चला और वे शहादत के लिए तैयार हो गए, तो ५६ इंच वालों के हाथ-पांव फूल गए। उन्होंने वांगचुक को उठाया और अस्पताल पहुंचा दिया। लेकिन इसके साथ ही पूरे देश में असंतोष की आग भड़क उठी और लाखों तिलचट्टे दिल्ली के `जंतर-मंतर’ पर जमा हो गए। उन्होंने `इंकलाब’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई। वांगचुक अस्पताल में और `जंतर-मंतर’ पर तिलचट्टों का भारी हुजूम, यह मंजर सरकार का दिमाग ठिकाने लगाने वाला है। प्रदर्शनकारियों के मोर्चे ने तो सीधे संसद भवन पर ही धावा बोल दिया। मुंबई में आदित्य ठाकरे की अगुवाई में शिवाजी पार्क में हजारों तिलचट्टों की भीड़ जुट गई। महाराष्ट्र के नागपुर और पुणे में हजारों तिलचट्टे सड़कों पर उतरकर वांगचुक का समर्थन कर रहे हैं। `जंतर-मंतर’ पर भीड़ बढ़ती जा रही है। देश के कोने-कोने से तिलचट्टों के आंदोलन की खबरें आ रही हैं, फिर भी शिक्षा के मंदिर को भ्रष्ट करने वाले धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेने को मोदी तैयार नहीं हैं। धर्मेंद्र प्रधान आखिर लगते क्या हैं? क्या वे सरकार के दामाद हैं या मोदी के मानसपुत्र? वे चाहे किसी के कुछ भी हों, उन्होंने भारतीय युवाओं की जिंदगी बर्बाद कर दी है। `नीट’ परीक्षा का पेपर लीक होने की जिम्मेदारी प्रधान के सिर ही आती है और इसकी सजा उन्हें मिलनी ही चाहिए। मोदी `एपस्टीन’ मामले में फंसे हरदीप पुरी का इस्तीफा नहीं लेते। अर्थव्यवस्था की धज्जियां उड़ाने वाली निर्मला सीतारमण का इस्तीफा नहीं लेते। चीन ने लद्दाख में जमीन हड़प ली, फिर भी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का इस्तीफा नहीं लेते। न्याय व्यवस्था बाजार में
नीलामी के लिए उपलब्ध
है, फिर भी मुख्य न्यायाधीश और कानून मंत्री का इस्तीफा नहीं लेते। संविधान के १०वें अनुच्छेद में `फूट’ और दलबदल की कोई मान्यता न होने के बावजूद लोकसभा अध्यक्ष `गद्दार’ सांसदों के गुट को मान्यता दे रहे हैं। इस संविधान द्रोह के खिलाफ वे लोकसभा अध्यक्ष का इस्तीफा नहीं लेते। देश की विदेश नीति पूरी तरह नाकाम हो चुकी है, फिर भी उस महकमे के मंत्री जयशंकर का इस्तीफा मोदी नहीं लेते। अयोध्या में राम मंदिर लूटा जा रहा है, फिर भी मोदी राम मंदिर ट्रस्ट से इस्तीफा नहीं दिलवाते। देश में कानून-व्यवस्था के नाम पर अराजकता फैली है, मणिपुर जल रहा है, भ्रष्टाचार चरम पर है, केंद्रीय जांच एजेंसियों और चुनाव आयोग ने शर्म घोलकर पी ली है, फिर भी गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा मोदी नहीं लेते। इन तमाम हरामखोर और नालायक मंत्रियों को संरक्षण देकर देश को बर्बाद करने का `द्रोह’ मोदी कर रहे हैं। इसीलिए लाखों तिलचट्टे संसद भवन पर धावा बोलकर मोदी के इस्ताफे की मांग कर रहे हैं। यही अब क्रांति की शुरुआत है। मोदी प्रधानमंत्री के रूप में अपना कर्तव्य निभाने में नाकाम रहे हैं। यह देशद्रोह है। मोदी ने १२ सालों में १२ लाख बार देश से झूठ बोला है। उनके बनाए अंधभक्तों ने लोकतंत्र की गरिमा को तार-तार कर दिया। देश के चुनाव और नतीजे चुराए गए। मोदी का पाखंड पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। सोनम वांगचुक की अगुवाई में लाखों तिलचट्टे क्रांति की ओर एक-एक कदम आगे बढ़ा रहे हैं। इस वक्त जय शाह कहां हैं? वे यकीनन विदेश में सुरक्षित होंगे। केंद्रीय मंत्रियों के बच्चे विदेशी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे हैं, मोटी तनख्वाहों वाली नौकरियां कर रहे हैं; लेकिन लाखों बेरोजगार तिलचट्टों ने इन बच्चों के बापों की नींद उड़ा दी है। तिलचट्टे अब इनके घरों में घुसेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, सुप्रीम कोर्ट और राजभवन में घुसेंगे। आपका जीना दूभर कर देंगे। तिलचट्टों ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है। मोदी-शाह चले जाओ!

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