मुख्यपृष्ठटॉप समाचारदिल्ली में अमानवीय लाठीचार्ज!

दिल्ली में अमानवीय लाठीचार्ज!

 -आंसू गैस और इंटरनेट बंदी से जेन जी आंदोलन कुचलने का भरसक प्रयास
-छात्रों व युवाओं के सिर फोड़े, हाथ पैर तोड़े, रविवार रात ही हो चुका था लाठीचार्ज का फैसला
-संसद मार्च पर संग्राम…छात्रों से पुलिस की जगह-जगह झड़प

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ सोमवार को निकाला गया कॉकरोच जनता पार्टी का ‘संसद चलो’ मार्च राजधानी की सड़कों पर बड़े टकराव में बदल गया। जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की। इस बीच प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ बैरिकेड्स में बिजली का करंट प्रवाहित किया गया था। हालांकि, देर शाम तक इस गंभीर आरोप की न तो दिल्ली पुलिस ने पुष्टि की और न ही किसी स्वतंत्र विश्वसनीय स्रोत से इसकी पुष्टि हो सकी।
जंतर-मंतर, शास्त्री भवन और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के आसपास पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच कई बार धक्का-मुक्की हुई। बैरिकेड्स पार करने की कोशिश कर रहे युवाओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और कुछ स्थानों पर आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। कई छात्रों के घायल होने तथा बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबर है।
तैनात किए गए थे ५ हजार जवान
सुरक्षा व्यवस्था के तहत मध्य दिल्ली में करीब पांच हजार जवान तैनात किए गए और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा १६३ लागू रही। दिल्ली पुलिस का कहना था कि संसद तक मार्च के लिए अनुमति नहीं दी गई थी। भीड़ बढ़ने के बाद जनपथ, पटेल चौक और केंद्रीय सचिवालय सहित कई मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया।
बंद कर दी गई थीं मोबाइल इंटरनेट सेवाएं!
दिल्ली के जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवा बाधित किए जाने की खबरें भी सामने आर्इं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार आंदोलन की तस्वीरें और वीडियो बाहर जाने से रोकना चाहती थी। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में भी इंटरनेट पाबंदी, पुलिस बल प्रयोग और संसद की ओर बढ़ती भीड़ का उल्लेख किया गया है। आंदोलन के प्रमुख अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक के आग्रह पर भूख हड़ताल समाप्त कर दी। अस्पताल में भर्ती वांगचुक ने खुद को स्वस्थ बताते हुए शांतिपूर्ण संसद मार्च की अनुमति देने की मांग की। इस पूरे घटनाक्रम के बीच ‘बैरिकेड्स पर करंट’ लगाने का दावा सबसे गंभीर बन गया है। यदि इसकी पुष्टि होती है तो यह प्रदर्शनकारियों की जान को खतरे में डालने और सुरक्षा नियमों के घोर उल्लंघन का मामला होगा। फिलहाल, इस दावे की निष्पक्ष जांच और दिल्ली पुलिस के स्पष्ट जवाब की जरूरत है।

अन्य समाचार