अनिल मिश्र / नई दिल्ली
झारखंड प्रदेश के चतरा संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे सांसद कालीचरण सिंह ने संसद के मानसून सत्र में नियम 377 के तहत टंडवा एवं आसपास के कोयला उत्पादक क्षेत्रों में अनियंत्रित एवं भारी कोयला परिवहन से उत्पन्न गंभीर जनसमस्याओं को सदन के समक्ष प्रमुखता से उठाया।
सांसद ने कहा कि कोयला उत्पादन क्षेत्र देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन इन क्षेत्रों से गुजरने वाले भारी वाहनों के अनियंत्रित आवागमन के कारण स्थानीय लोगों को लगातार जाम, सड़क दुर्घटनाओं, धूल, प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
इस दौरान चतरा सांसद ने सदन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि टंडवा, सिमरिया, चतरा, गिद्धौर सहित आसपास के कोयला उत्पादक क्षेत्रों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में भारी वाहन कोयले का परिवहन करते हैं। इन वाहनों के कारण कई प्रमुख सड़कों पर दिन-रात यातायात का दबाव बना रहता है। कई स्थानों पर घंटों जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिससे आम लोगों, विद्यार्थियों, मरीजों, कर्मचारियों और छोटे वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। सड़क पर उड़ने वाली कोयले की धूल और अत्यधिक धूलकणों के कारण आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है। वहीं, लंबे समय तक ऐसी स्थिति बने रहना पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी गंभीर चुनौती है।
सांसद ने केंद्र सरकार से मांग की कि टंडवा एवं आसपास के कोयला उत्पादक क्षेत्रों में आम यातायात से अलग एक समर्पित एवं समयबद्ध कोल ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर का निर्माण कराया जाए। उन्होंने कहा कि कोयले की ढुलाई के लिए ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिससे भारी वाहनों का दबाव आबादी वाले क्षेत्रों और आम सड़कों से कम हो सके।
उन्होंने कहा कि कोयला परिवहन के लिए रेल नेटवर्क, कन्वेयर बेल्ट और अन्य आधुनिक एवं प्रदूषण-मुक्त परिवहन प्रणालियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इससे न केवल सड़क दुर्घटनाओं और जाम की समस्या में कमी आएगी, बल्कि धूल एवं वायु प्रदूषण पर भी प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकेगा।
इस दौरान सांसद ने प्रभावित क्षेत्रों में प्रभावी प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था लागू करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि कोयला परिवहन मार्गों पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव, वाहनों को ढककर परिवहन, प्रदूषण की नियमित निगरानी तथा पर्यावरणीय मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही कोयला उत्पादक क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जाने चाहिए। विशेष रूप से श्वसन संबंधी बीमारियों से बचाव और समय पर उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से विशेष व्यवस्था की आवश्यकता है।
वहीं, चतरा सांसद कालीचरण सिंह ने कहा कि कोयला उत्पादन देश के विकास और ऊर्जा सुरक्षा के लिए आवश्यक है, लेकिन विकास की प्रक्रिया में स्थानीय जनता की सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण की अनदेखी नहीं की जा सकती। कोयला उत्पादक क्षेत्रों के लोगों को विकास की कीमत प्रदूषण, दुर्घटनाओं, जाम और स्वास्थ्य संकट के रूप में नहीं चुकानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि टंडवा और आसपास के क्षेत्रों में कोयला परिवहन की समस्या का स्थायी समाधान आवश्यक है। समर्पित कोल ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर, आधुनिक परिवहन व्यवस्था, प्रभावी प्रदूषण नियंत्रण और नियमित स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से ही क्षेत्र में विकास और जनहित के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है।
सांसद ने केंद्र सरकार से इस गंभीर विषय पर शीघ्र ठोस कदम उठाने की मांग करते हुए कहा कि कोयला उत्पादन और औद्योगिक विकास के साथ-साथ स्थानीय जनता की सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण भी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।
