अनिल मिश्र / रांची
झारखंड प्रदेश की राजधानी रांची से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित श्री बृज गोपिका सेवा मिशन, रामगढ़ द्वारा गणक मैरिज हॉल में डॉ. युगल शरण जी के सान्निध्य में आयोजित तीन दिवसीय संगीतमय प्रवचन का आज सुमधुर समापन हुआ।
प्रातःकालीन समापन सत्र में स्वामीजी ने बताया कि हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि चैतन्य महाप्रभु इसी रामगढ़ की पुण्य धरा के समीप से गुजरते हुए वृंदावन पहुंचे थे। उनकी स्मृतियां आज भी चरण पहाड़ी में शेष एवं सुरक्षित हैं। उनका ‘हरे राम, हरे कृष्ण’ का अतिशय पावन महामंत्र समस्त विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने वाला है। ‘हरे राम, हरे कृष्ण’ का संकीर्तन मोक्षादि कामनाओं को भी पूर्ण करने में सक्षम है।
स्वामीजी ने यह भी बताया कि गुरु सेवा, गुरु कृपा और संकीर्तन से ही यथेष्ट कर्म करने की प्रेरणा मिलती है तथा मन की शुद्धता एवं दान का वास्तविक महत्व समझ में आता है।
गुरु प्रसाद के रूप में फल वितरित करने के पश्चात रक्षाबंधन के क्रम में स्वामीजी ने गुरु परंपरा का निर्वहन करते हुए सभी को इस कामना और आशीर्वाद के साथ रक्षासूत्र बांधा कि सभी रक्षित, दीर्घायु एवं स्मृतियों में बने रहें। स्वामीजी ने यह भी कहा कि ऐसे सत्संग, सामीप्य और सौभाग्य की बेला पुनः आए।
स्वामीजी की भावभीनी विदाई के बाद बृज गोपिका सेवा मिशन, रामगढ़ के सदस्यगण उनके वाहन को तब तक अपलक निहारते रहे, जब तक वे दृष्टि से ओझल नहीं हो गए।
इस संबंध में जानकारी बृज गोपिका सेवा मिशन, रामगढ़ के मीडिया प्रभारी राज रामगढ़ी ने साझा की।
