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झारखंड में नीट पेपर लीक एवं जेपीएससी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर पक्ष-विपक्ष में जबरदस्त तकरार

युवाओं और विशेषज्ञों की राय: परीक्षा व्यवस्था तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी हो

अनिल मिश्र / रांची

इस समय पूरे देश में नीट परीक्षा पेपर लीक का मुद्दा लगातार राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बना हुआ है। लोकसभा और राज्यसभा से लेकर सड़कों तक विभिन्न राजनीतिक दल इस विषय को लेकर एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। वहीं, वर्षों की मेहनत के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले लाखों अभ्यर्थी इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
गौरतलब है कि हाल के महीनों में नीट परीक्षा और झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने इस मुद्दे को और अधिक गंभीर बना दिया है। विभिन्न राजनीतिक दल इन मामलों को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकारों से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
देशभर में नीट परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक के आरोपों को लेकर लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। वहीं, झारखंड में जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों के बाद मामला सुर्खियों में है। इस प्रकरण की जांच अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) द्वारा की जा रही है।
इसी बीच झारखंड सरकार ने भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी कई परीक्षाओं को स्थगित कर दिया है। मामले की जांच के दौरान कई स्तरों पर कार्रवाई भी हुई है और यह विषय राज्य की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बन गया है।
सड़कों पर उतरे विभिन्न राजनीतिक दल
झारखंड में विभिन्न राजनीतिक दलों तथा उनके छात्र एवं युवा संगठनों ने अलग-अलग कार्यक्रमों के माध्यम से पेपर लीक के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। भारतीय जनता युवा मोर्चा ने राज्य के विभिन्न जिलों में मशाल जुलूस निकालकर भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग की। वहीं, कांग्रेस ने नीट परीक्षा पेपर लीक के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने भी इस विषय पर अपना पक्ष रखते हुए विरोध कार्यक्रम आयोजित किए। इसके अलावा वामपंथी दलों ने भी परीक्षा प्रणाली में सुधार तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।
इस बीच राजनीतिक दल एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार, अनियमितता और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने के आरोप लगा रहे हैं, जिससे यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक रूप लेता जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पेपर लीक की घटनाओं का सबसे बड़ा नुकसान उन लाखों युवाओं को होता है, जो वर्षों तक तैयारी कर प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। परीक्षा रद्द होने या विवादों में घिरने से अभ्यर्थियों का समय, मेहनत और मानसिक संतुलन प्रभावित होता है।
वहीं, युवाओं का कहना है कि उन्हें राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि ऐसी पारदर्शी और भरोसेमंद परीक्षा व्यवस्था चाहिए, जिसमें उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके।
स्थायी समाधान की मांग
पेपर लीक कोई नई समस्या नहीं है। पिछले कई वर्षों में देश के विभिन्न राज्यों में अनेक प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे में शिक्षा विशेषज्ञों और कई सामाजिक संगठनों का मानना है कि इस समस्या का समाधान केवल राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि व्यापक नीतिगत सुधार, तकनीकी सुरक्षा, कड़े कानून और निष्पक्ष जांच व्यवस्था से ही संभव है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर दीर्घकालिक रणनीति तैयार करनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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