सामना संवाददाता / राजस्थान
राजस्थान के झुंझुनूं जिले में भारतीय सेना के हवलदार नरेश सिंह तंवर को शनिवार को उनके पैतृक गांव बुहाना में पूरे सैनिक सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, माहौल गमगीन हो गया। परिजनों की आंखें नम थीं और हर जुबान पर जवान की देशसेवा का जिक्र था।
भिर्र गांव से बुहाना तक निकाली गई तिरंगा यात्रा में सैकड़ों ग्रामीण, युवा और पूर्व सैनिक शामिल हुए। हाथों में तिरंगा लिए लोगों ने “भारत माता की जय” और “नरेश सिंह अमर रहें” के नारों के बीच अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी।
श्मशान घाट पर सेना की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी। इस भावुक क्षण में जवान के अग्निवीर पुत्र सचिन ने पिता को मुखाग्नि दी, जबकि पुत्री मुस्कान ने सैल्यूट कर अपने पिता को अंतिम विदाई दी। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर गया। सेना के अधिकारियों ने राष्ट्रीय ध्वज परिजनों को सौंपते हुए दिवंगत सैनिक के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
नरेश सिंह तंवर का जन्म 2 जुलाई 1983 को हुआ था। उन्होंने 18 जून 2001 को दिल्ली स्थित राजपूताना राइफल्स सेंटर से भारतीय सेना में भर्ती होकर देशसेवा का संकल्प लिया था। करीब 25 वर्षों तक उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी सेवाएं दीं। ड्यूटी से लौटते समय ट्रेन की चपेट में आने से उनका निधन हो गया।
नरेश सिंह का परिवार लंबे समय से देशसेवा की परंपरा निभाता आ रहा है। उनके पिता भागीरथ सिंह और बड़े भाई अशोक सिंह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं, जबकि छोटे भाई सुरेश सिंह वर्तमान में सेना में सेवाएं दे रहे हैं। उनके पुत्र सचिन अग्निवीर के रूप में प्रशिक्षण ले रहे हैं और पुत्री मुस्कान अध्ययनरत हैं।
अंतिम संस्कार में पूर्व विधायक सुभाष पूनिया, भाजपा जिलाध्यक्ष रतन सिंह तंवर, तहसीलदार बाबूलाल जाट, नगर पालिका ईओ सुरेंद्र कुमार, थानाधिकारी राममनोहर, नगर पालिका चेयरमैन दशरथ तंवर, पूर्व उपप्रधान राजपाल सिंह तंवर सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, पूर्व सैनिकों, ग्रामीणों और युवाओं ने पहुंचकर दिवंगत जवान को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
